नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में लगभग चार दशक पहले लगाए गए आपातकाल को याद करते हुए रविवार को कहा कि यह काली रात देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर ब़डा आघात थी। आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ’’मन की बात’’ के ३३वें संस्करण में २५ जून की रात लगाए गए आपातकाल को याद करते हुए मोदी ने कहा कि ४२ वर्ष पहले की इस रात को कोई भी लोकतंत्र प्रेमी और भारतवासी भुला नहीं सकता। उन्होंने कहा, एक प्रकार से देश को जेलखाने में बदल दिया गया था। विरोधी स्वर को दबोच दिया गया था। जयप्रकाश नारायण सहित देश के गणमान्य नेताओं को जेलों में बंद कर दिया था। न्याय व्यवस्था भी आपातकाल के उस भयावह रूप की छाया से बच नहीं पाई थी। अख़बारों को तो पूरी तरह बेकार कर दिया गया था। मोदी ने कहा कि लोकतंत्र एक व्यवस्था है और एक संस्कार भी है। इसके प्रति नित्य जागरूकता जरूरी है। लोकतंत्र को आघात पहुंचाने वाली बातों को भी स्मरण करना होता है और लोकतंत्र की अच्छी बातों की दिशा में आगे ब़ढना होता है। उन्होंने युवाओं और लोकतंत्र प्रेमियों का आह्वान किया कि वे लोकतंत्र के संरक्षण के लिए हमेशा सजग रहें। उन्होंने कहा, आज के पत्रकारिता जगत के विद्यार्थी, लोकतंत्र में काम करने वाले लोग, उस काले कालखंड को बार-बार स्मरण करते हुए लोकतंत्र के प्रति जागरूकता ब़ढाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहे हैं और करते भी रहने चाहिए। मोदी ने आपातकाल को याद करते हुए आगे कहा, उस समय अटल बिहारी वाजपेयी भी जेल में थे। मोदी ने कहा कि उस समय लोकतंत्र प्रेमियों ने ब़डी ल़डाई ल़डी और इस महान देश ने जब मौका मिला तो चुनाव के माध्यम से उस ता़कत का प्रदर्शन कर दिया जिससे पता चलता है कि भारत के जन-जन की रग-रग में लोकतंत्र किस तरह से व्याप्त है, जन-जन की रग-रग में फैला हुआ। लोकतंत्र को देश की धरोहर बताते हुए उन्होंने देशवासियों से संजो कर संरक्षित रखने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा, यह लोकतंत्र का भाव हमारी अमर विरासत है। इस विरासत को हमें और सशक्त करना है।