दार्जिलिंग। हिंसाग्रस्त दार्जिलिंग पहाि़डयों में महिलाओं के एक समूह ने अलग गोरखालैंड की मांग के लिए गांधीगीरी का सहारा लिया। तिरंगे और पोस्टर हाथ में लिए महिलाओं ने रैलियां निकाली और नारे लगाए, हमें गोरखालैंड चाहिए, गांधी के देश में, गांधीगीरी जिंदाबाद। इस समूह की एक सदस्य रोमिता राय ने कहा, हमारा मानना है कि हिंसा किसी बात का हल नहीं है और ना ही इससे किसी उद्देश्य की पूर्ति हो सकती है। ब्रिटिश राज से भारत को आजादी महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन और सत्याग्रह की वजह से मिली। हमारा मानना है कि अगर हमें बंगाल से आजादी चाहिए और यदि हम हमारा अलग राज्य चाहते हैं तो हमें भी अहिंसा और सत्याग्रह का रास्ता अपनाना होगा। समूह की एक अन्य सदस्य मीना गुरूंग ने कहा कि वे हर रोज रैलियां निकालेंगे, लेकिन ना तो भ़डकाऊ नारेबाजी करेंगे और ना ही हिंसा करेंगे। बस गोरखालैंड बनाने की अपनी मांग का नारा लगाएंगे। यदि पुलिस हमे रोकेगी तो हम स़डक पर ही बैठ जाएंगे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। गुरूंग ने बताया कि उनकी योजना भूख ह़डताल करने की भी है। ये महिलाएं विभिन्न धर्म, जाति और दलों से हैं।जीजेएम प्रायोजित बंद बुधवार को लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। इंटरनेट सेवाएं भी ठप रहीं और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। पुलिस और सुरक्षा बलों ने पहा़डी क्षेत्रों में गश्त की। इसके अलावा दार्जिलिंग के प्रवेश और निकासी मार्गों पर पुलिस ने नाकेबंदी की। दवा की दुकानों को छो़डकर अन्य दुकानें, होटल तथा रेस्टोरेंट बंद रहे।जीजेएम प्रायोजित बंद बुधवार को लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। इंटरनेट सेवाएं भी ठप रहीं और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। पुलिस और सुरक्षा बलों ने पहा़डी क्षेत्रों में गश्त की। इसके अलावा दार्जिलिंग के प्रवेश और निकासी मार्गों पर पुलिस ने नाकेबंदी की। दवा की दुकानों को छो़डकर अन्य दुकानें, होटल तथा रेस्टोरेंट बंद रहे।