शियामेन। भ्रष्टाचार और कालेधन के विरुद्ध जारी भारत की ल़डाई को सोमवार को उस समय और बल मिला जब ब्रिक्स देशों ने लाभ के कर रहित देशों में हस्तांतरण के जरिये होने वाली कर चोरी से निपटने के लिए आधुनिक वैश्विक कर तंत्र बनाने की इच्छा जताई। ब्रिक्स की बैठक के मुख्य सत्र के बाद जारी संयुक्त घोषणापत्र में यह बात कही गई है। पच्चीस पृष्ठ के घोषणापत्र में कहा गया है कि ब्रिक्स अंतरराष्ट्रीय कर नियम बनाकर कर सहयोग को मजबूत बनाएगा। इस नियम में हर देश की प्राथमिकता के अनुसार अन्य विकासशील देशों को समुचित प्रौद्योगिकी सहायता दी जाएगी।

श्यामन। ब्रिक्स देशों ने पहली बार अपने घोषणापत्र में क्षेत्र में हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने वाले लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठनों के नाम लिए हैं जिसे भारत के लिए एक ब़डी राजनयिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है । ब्रिक्स नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने, साजिश रचने और सहयोग करने वालों को जवाबदेह ठहराना चाहिए। भारत के लिए ब़डी राजनयिक जीत के घटनाक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्राजील के राष्ट्रपति माइकल टेमर और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति जैकब जुमा ने इन संगठनों की आतंकी गतिविधियों की क़डी निंदा की और इस समस्या से मिलकर ल़डने की प्रतिबद्धता जताई।ब्रिक्स नेताओं की बैठक के बाद जारी ४३ पृष्ठों के श्यामन घोषणापत्र को पारित किया गया जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि अफगानिस्तान में हिंसा पर तत्काल विराम लगाने की जरूरत है। इसमें कहा गया, इस संदर्भ में, हम क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और तालिबान, आईएसआईएस, अल-कायदा एवं इसके सहयोगियों द्वारा की जाने वाली हिंसा पर चिंता जाहिर करते हैं। अल कायदा के सहयोगियों में ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम), इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उजबेकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और हिज्ब उत-तहरीर शामिल हैं। गौरतलब है कि ईटीआईएम चरीन के शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र में सक्रिय है और वह ईस्ट तुर्किस्तान की स्थापना की मांग कर रहा है।अधिकारियों के अनुसार मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आतंकवाद का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया और दूसरे नेताओं ने भी उनका समर्थन किया और इस समस्या से ल़डने की इच्छा प्रकट की। विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) प्रीति सरन ने संवाददाताओं से कहा, पहली बार आतंकी संगठनों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। पाकिस्तान आधारित संगठनों के नाम घोषणापत्र में शामिल किया जाने का खासा महत्व है क्योंकि यह पाकिस्तान से गतिविधियां संचालित करने वाले आतंकवादी समूहों को लेकर चीन की राय में थो़डा बदलाव का संकेत है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था, हमने इसका संज्ञान लिया है कि जब पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी कदम की बात आती है जो भारत की कुछ चिंताएं हैं। गोवा में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीन ने पाकिस्तान आधारित आतंकी समूहों के नाम घोषणापत्र में शामिल नहीं होने दिया था, जबकि यह सम्मेलन उरी हमले के कुछ सप्ताह के भीतर हुआ था। अब यह देखना होगा कि चीन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित कराने के प्रयास को लेकर क्या रुख अपनाता है। घोषणापत्र जारी होने के बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने इस सवाल को टाल दिया कि क्या अजहर के मामले पर चीन के रुख में कोई बदलाव आया है। फिलहाल चीन ने अजहर को आतंकी घोषित कराने संबंधी अमेरिकी प्रस्ताव पर रोक लगा रखी है।घोषणा में कहा गया कि आतंकी कृत्यों की साजिश रचने वालों, उन्हें अंजाम देने वालों और उन्हें समर्थन देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।घोषणा में मांग की गई कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा समग्र अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद समझौते को शीघ्रता से अंतिम रूप दिया जाए और इसे अंगीकार किया जाए।