चेन्नई। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत को लेकर संशय अभी भी बरकारार है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता का इलाज करने वाले अपोलो अस्पताल के चेयरमैन प्रताप सी रेड्डी पहले ही यह घोषणा कर चुके हैं वह जयललिता की मौत के मामले में किसी भी प्रकार की जांच का सामने करने के लिए तैयार हैं लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में कोई आदेश नहीं दिया गया है। हालांकि गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री ईके पलानीसामी ने कहा कि वह जल्द ही पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत की न्यायिक जांच का आदेश देंगे। पलानीसामी ने गुरुवार को यहां राज्य सचिवालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य के कई संगठनों और सामान्य नागरिकों की ओर से यह अनुरोध किया जा रहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत की जांच करवाई जाए। इसके साथ ही मीडिया में भी उनकी मौत को लेकर कई प्रकार की बातेंे कही जा रही थी। लोगों को अनुरोध को स्वीकार करते हुए और मीडिया में लगाए जा रहे अनुमानों और प्रकट किए जा रहे संदेहों पर विराम लगाने के लिए हमने पूर्व मुख्यमंत्री की मौत की न्यायिक जांच करवाने का निर्णय लिया है।उन्होंने कहा कि एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में एक कमेटी का गठन किया जाएगा और उसी कमेटी द्वारा इस मामले की जांच की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री न सिर्फ एक नेता थी बल्कि वह इस राज्य के करो़डों लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान रहती थी। उनके लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद लंबे समय बाद उनके स्वास्थ्य के बारे में आम लोगों को सूचना मिलनी शुरु हुई और ऐसे में लोगों के मन में उनके निधन को लेकर कई प्रकार की शंकाएं हैं और इन शंकाओं का निवारण करना हमारा कर्तव्य है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूर्व मुख्यमंत्री के आवास वेदा निलयम को भी अधिग्रहित करेगी और इसे उनके स्मारक के रुप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य की युवा पीढी और राजनेताओं का एक ब़डा तबका जयललिता को अपना आदर्श मानता है और इसलिए उनके आवास को सुरक्षित रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि काफी संख्या में राज्य के लोगों द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री के आवास को एक स्मारक के रुप में विकसित करने का अनुरोध कर रहे हैं ताकि राज्य और देश की आने वाली पीढियां इस महान नेता के बारे में जान सकंें। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इसे स्मारक का रुप देने का निर्णय लिया है। ज्ञातव्य है कि इन दोनों घोषणाओं को अखिल भारतीय अन्ना द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के पलानीसामी और पन्नीरसेल्वम ध़डे के विलय के संकेत के रुप में देखा जा रहा है। यह दोनों ही कार्य ऐसे हैं जिसे पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम ने पलानीसामी ध़डे के समक्ष विलय की शर्तों के रुप में रखा था। पन्नीरसेल्वम ने शशिकला और उनके परिवार के सदस्यों को पार्टी से दरकिनार करने की मांग भी रखी थी जिसे पलानीसामी ध़डे द्वारा दिनाकरण के खिलाफ प्रस्ताव लाकर पहले ही पूरा किया जा चुका है। सूत्रों के अनुसार दोनों ध़डों के बीच तमिल कैलेंडर के आवनी महीने में विलय होगा। इस बीच दोनों ध़डों के वरिष्ठ नेताओं द्वारा विलय के मुद्दे पर सकारात्मक बयान दिए जा रहे हैं।