नई दिल्ली। माल एवं सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था को शुरू हुए दो दिन हुए हैं, इस दौरान इस नई व्यवस्था को लेकर फैलाई जा रही कुछ भ्रांतियों को राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने तुरंत दूर करने का अहम काम किया। उन्होंने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि जीएसटी व्यवस्था में हर समय इंटरनेट होना चाहिए, सच्चाई यह है कि केवल मासिक रिटर्न दाखिल करते समय ही इसकी आवश्यकता है। देश के इस सबसे ब़डे कर सुधार के पीछे अधिया का ब़डा हाथ रहा है। एक भ्रातिं यह फैलाई गई कि व्यक्ति बिजली, पानी जैसी सेवाओं के बिलों का भुगतान क्रेडिट कार्ड के जरिये कर रहा है तो वह दो बार जीएसटी का भुगतान कर रहा है।अधिया ने इसे पूरी तरह से गलत करार दिया है। उन्होंने ट्वीटर पर कहा, यह पूरी तरह से गलत है। कृपया इस तरह के संदेशों को प्राधिकरण के साथ जांच किए बिना आगे नहीं भेंजें। देश में ३० जून और एक जुलाई की मध्यरात्रि को माल एवं सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था को लागू कर दिया गया है। इसमें ५, १२, १८ और २८ प्रतिशत की चार दरें रखी गई हैं। व्यवस्था लागू होने के बाद से ही लोग सोशल मीडिया साइट पर रेस्त्रां, किराने की दुकान से खरीदे माल के बिल डाल रहे हैं जिसमें जीएसटी के रूप में कर लगाया गया है। अधिया ने इसी संबंध में फैलाए जा रहे मिथक कि वैट के मुकाबले जीएसटी दर ऊंची है, दूर करते हुए ट्वीट किया, यह इसलिए ऊंचा लगता है कि पहले इसमें उत्पाद शुल्क और अन्य कर नहीं दिखाई देते थे उनका पता नहीं चलता था लेकिन अब यह जीएसटी में समाहित होने की वजह से दिखता है। अधिया ने एक और भ्रांति को दूर करते हुए कहा कि कारोबारी जीएसटी के तहत अस्थायी आईडी नंबर से भी काम कर सकते हैं। उन्हें जीएसटी करदाता पहचान संख्या (जीएसटीआईएन) के लिए प्रतीक्षा करने की जरूरत नहीं है।