ई दिल्ली। देश के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश के लिए करीब १२ लाख छात्रों के भविष्य का फैसला करने वाले नीट २०१७ परीक्षा परिणाम की घोषणा का मार्ग प्रशस्त करते हुए उच्चतम न्यायालय ने परिणामों की घोषणा पर रोक संबन्धी मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश पर सोमवार को रोक लगा दी। न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह पहले से तय कार्यक्रम के आधार पर परीक्षा परिणाम की घोषणा, काउंसिलिंग और दाखिला करें।न्यायमूर्ति पीसी पंत और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अवकाश पीठ ने कहा कि परीक्षा परिणाम की घोषणा और उसके बाद होने वाली काउंसिलिंग और दाखिला न्यायालय के समक्ष लंबित मामले के फैसले के अधीन होगा। पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों से अनुरोध किया कि वे नीट परीक्षा २०१७ से संबंधित किसी भी याचिका को स्वीकार ना करें। सीबीएसई की ओर से मद्रास उच्च न्यायालय के २४ मई के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने यह आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने सीबीएसई द्वारा नीट परीक्षा २०१७ के परिणामों की घोषणा करने पर रोक लगा दी थी।सीबीएसई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) मनिन्दर सिंह ने पीठ को बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के कारण परीक्षा परिणाम घोषित करने और उसके बाद दाखिले की प्रक्रिया रुक गई है, साथ ही वह आदेश उच्चतम न्यायालय द्वारा पहले तय प्रक्रिया के साथ टकराव की स्थिति में है।पीठ ने कहा, हम सिर्फ एक आधार पर उच्च न्यायालय के फैसले पर स्थगन लगा रहे हैं। यह आदेश परोक्ष तौर पर उच्चतम न्यायालय द्वारा तय कार्यक्रम को कमजोर बना रहा है। ग्रीष्मावकाश के बाद मामले की सुनवाई की तारीख तय करते हुए पीठ ने कहा, उपरोक्त को देखते हुए, अंतरिम आदेश पर स्थगन लगाया जाता है और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे नीट २०१७ का परीक्षा परिणाम घोषित करें। हालांकि परिणाम की घोषणा के साथ ही नीट के जरिये काउंसलिंग और दाखिला उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित मामले के निर्णय पर निर्भर करेगा।