कोलकाता। गिरफ्तार किए गए कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सीएस कर्णन को चेन्नई से यहां लाया गया और उन्हें प्रेजीडेंसी जेल भेज दिया गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सीआईडी के अधिकारियों की एक टीम उन्हें एयर इंडिया की उ़डान से यहां लेकर आई। कर्णन उन्हें छह महीने कैद की सजा सुनाए जाने के उच्चतम न्यायालय के नौ मई के फैसले के बाद से ही गिरफ्तारी से बचते आ रहे थे। उन्हें मंगलवार रात पश्चिम बंगाल सीआईडी की टीम ने कोयंबटूर से लगभग छह किलोमीटर दूर मलुमिचमपट्टी स्थित एक निजी रिजॉर्ट से गिरफ्तार कर लिया था जहां वह पिछले कुछ दिनों से छिपे थे। अधिकारी ने कहा, हवाईअड्डे पर उनके मेडिकल परीक्षण पूरे कर लिए गए और उन्हें सीधे जेल ले जाया गया। हवाईअड्डे पर सुरक्षा के क़डे इंतजाम थे जहां कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद थे।पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोलकाता से तीन पुलिस टीम कोयंबटूर में डेरा डाले हुए थीं और मोबाइल फोन कॉल के आधार पर उन्होंने कर्णन का पता लगा लिया। तमिलनाडु पुलिस उनका पता लगाने में मदद के लिए तकनीकी सहायता मुहैया करा रही थी। कर्णन उच्च न्यायालय के ऐसे पहले मौजूदा न्यायाधीश रहे जिन्हें शीर्ष अदालत ने कैद की सजा सुनाई। वह भगो़डा रहते हुए गत १२ जून को सेवानिवृा हो गए थे। प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की पीठ ने न्यायालय की अवमानना के मामले में कर्णन को छह महीने कैद की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के तीन दिन बाद कर्णन अपनी गिरफ्तारी पर स्थगन के लिए शीर्ष अदालत पहुंचे थे। वर्ष १९८३ में तमिलनाडु बार काउंसिल के साथ वकील के रूप में जु़डे कर्णन २००९ में मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त किए गए थे। ग्यारह मार्च २०१६ को उनका तबादला कलकाा उच्च न्यायालय कर दिया गया था।फ्रुझ्श्नर्‍द्ब ·र्ैंह्ट्टश्च द्मष्ठ ट्ठरु·र्ैंद्यय्ंश्च ज्द्बय्द्मत्र द्भय्यघ्·र्ैंय् नई दिल्ली। कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सीएस कर्णन की गिरफ्तारी के एक दिन बाद उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को अंतरिम जमानत और अवमानना के अपराध में छह महीने की सजा का फैसला निलंबित करने की उनकी याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मामले में सात न्यायाधीशों के आदेश से बंधी हुई है और इसके इतर नहीं जा सकती। न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड और न्यायमूर्ति सजय किशन कौल की अवकाशकालीन पीठ ने कहा, इस मामले की सुनवाई सात न्यायाधीशों की पीठ ने की थी और आदेश पारित किया था। यह आदेश हमारे लिए बाध्यकारी है। हम अवकाश के दौरान इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते। इस मामले में कुछ नहीं कर सकते।