बचाव पक्ष के वकील की दलील काम नहीं आई

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  • जज ने कहा, यह जंगली जानवर रहम के लायक नहीं

रोहतक। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दो साध्वियों का बलात्कार करने का दोषी पाये जाने पर सीबीआई की विशेष अदालत ने 20 वर्ष की कैद की सजा सुना दी है। बचाव पक्ष के वकील ने अपनी तरफ से खूब दलील दी कि गुरमीत राम रहीम बहुत सारे समाजसेवी काम करता है जिसमें भ्रूण हत्या के खिलाफ जागरूकता के साथ साथ निर्धन युवतियों एवं वेश्याओं की शादी भी करवाता रहा है। वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल गुरमीत वृक्षारोपण सहित करीब 133 प्रकार के सामाजिक कल्याण के कार्य करता आया है।

वकील ने गुरमीत के स्वास्थ्य आधार पर भी नरमी बरतने की जज जगदीप सिंह से दरखास्त की परन्तु जज ने साफ साफ कहा कि इस प्रकार के जंगली जानवर क्षमा के हकदार नहीं होते हैं। इस पर किसी प्रकार की रहम नहीं की जा सकती। यह कहते हुए उन्होंने दो मामलों में 10-10 वर्ष की कैद की सजा सुना दी और दोनों सजाएं अलग अलग चलेंगी।

जज जगदीप सिंह

सजा की मियाद पर दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद जज जगदीप सिंह ने अपने फैसले में कहा कि गुरमीत राम रहीम अदालत की सहानुभूति का हकदार नहीं है क्योंकि पीड़िताएं उसे भगवान का दर्जा देती थीं और उसकी पूजा करती थीं्‌। अदालत ने फैसले में कहा कि गुरमीत राम रहीम ने अपनी शिष्या बनी पवित्र साध्वियों को भी नहीं छोड़ा और जंगली जानवर की तरह बरताव किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि गुरमीत राम रहीम के कृत्य से इस प्राचीन देश की संस्कृति को ऐसी क्षति पहुंची है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। गुरमीत राम रहीम के कृत्य से पवित्र, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थाओं की छवि खराब हुई है।

सीबीआई अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि अभियुक्त को इसे आत्मसात करना चाहिए कि उसने केवल पीड़िता की जिंदगी को दागदार नहीं किया बल्कि उसने पूरे सामाजिक तानेबाने को छिन्न-भिन्न किया है। अदालत ने अपने फैसले में महात्मा गांधी के उद्धरण का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा है कि महिला का साहस पुरुष से श्रेष्ठ होता है और उसके बिना पुरुष नहीं रह सकता।