नई दिल्ली। प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर ने शनिवार को कहा कि अलग हुए जीवन साथियों के बीच बच्चों पर कब्जे को लेकर होने वाला झग़डा राष्ट्रीय सीमाओं से बाहर चला जाता है तो इससे बच्चों पर भारी मानसिक तनाव प़डता है, ऐसे में अंतरदेशीय बाल संरक्षण के मामलों में एक कानून की अनिवार्यता है। उन्होंने कहा, एक मात्र सवाल यह होता है कि माता-पिता में से किसे बच्चे की जिम्मेदारी दी जाए। यह आसान नहीं है। यह सांस्कृतिक सवाल है जिसमें जीवन जीने का तरीका जु़डा है, जिन परंपराओं का बच्चा अभ्यस्त है। यह दो देशों की संप्रभुत्ता का भी सवाल है। यहां इंटरनेशनल लॉ एसोसिएशन द्वारा आयोजित अखिल भारतीय संगोष्ठी के उद्घाटन के मौके पर न्यायमूर्ति खेहर ने सरकार से समग्र कानून बनाने का आह्वान किया क्योंकि बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं और वैवाहिक विवाद की वजह से उनके शारीरिक, मानसिक और नैतिक स्वास्थ्य के संरक्षण से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, परिवार में माता-पिता के बीच होने वाले संघर्ष का बच्चे पर असर होना तय है। जब वैवाहिक विवाद बच्चे के संरक्षण की जंग में बदल जाता है तो संबंधित बच्चे पर गंभीर तनाव रहता है। उन्होंने कहा, जब यह राष्ट्रीय सीमाओं से पार चला जाता है तब बच्चे के हित पर असर प़डता है। कानूनी जंग संबंधित देशों के संप्रभु कानून में उलझ जाती है।