नई दिल्ली.कोविंद को एनडीए का उम्मीदवार घोषित किया गया है भाजपा ने एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का सोमवार को ऐलान कर दिया। दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले बिहार के गवर्नर रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया गया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कोविंद के नाम का ऐलान किया। अमित शाह ने बताया कि कोविंद के बारे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को जानकारी दे दी गई है। शाह के मुताबिक, पार्टी ने गरीब समाज से ताल्लुक रखने वाले शख्स को राष्ट्रपति बनाने का फैसला किया है। कोविंद के नाम का ऐलान करके अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक जानकारों को चौंका दिया है। राष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर लग रही राजनीतिक अटकलों में कहीं भी कोविंद का नाम सामने नहीं आया था। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि दलित चेहरा होने की वजह से कोविंद का विरोध होने की संभावना न के बराबर है।
कानपुर देहात की डेरापुर तहसील के गांव परौंख में जन्मे रामनाथ कोविंद ने सर्वोच्च न्यायालय में वकालत से कॅरियर की शुरुआत की। वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव बने। इसके बाद भाजपा नेतृत्व के संपर्क में आए।घाटमपुर से लड़ चुके हैं लोकसभा चुनाव।
कोविंद को पार्टी ने वर्ष 1990 में घाटमपुर लोकसभा सीट से टिकट दिया लेकिन वह चुनाव हार गए। वर्ष 1993 व 1999 में पार्टी ने उन्हें प्रदेश से दो बार राज्यसभा में भेजा। पार्टी के लिए दलित चेहरा बन गये कोविंद अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रवक्ता भी रहे।घाटमपुर से चुनाव लडऩे के बाद कोविंद लगातार क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं से संपर्क में रहे।
वर्ष 2007 में पार्टी ने उन्हें प्रदेश की राजनीति में सक्रिय करने के लिए भोगनीपुर सीट से चुनाव लड़ाया, लेकिन वह यह चुनाव भी हार गए। रामनाथ कोविंद प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी के साथ महामंत्री रहे ।
परौख गांव में 1945 में जन्मे रामनाथ कोविद की प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर ब्लाक के ग्राम खानपुर परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हुई। कानपुर नगर के बीएनएसडी इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद डीेएवी कॉलेज से बी कॉॅम व डीएवी लॉ कालेज से विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दिल्ली में रहकर आईएएस की परीक्षा तीसरे प्रयास में पास की लेकिन मुख्य सेवा के बजाय एलायड सेवा में चयन होने पर नौकरी ठुकरा दी। जून 1975 में आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार बनने पर वे वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव रहे थे। जनता पार्टी की सरकार में सुप्रीम कोर्ट के जूनियर काउंसलर के पद पर कार्य किया।
बिहार के राज्यपाल बनाए गए रामनाथ कोविद तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। परौख गांव में कोविद अपना पैतृक मकान बारातशाला के रूप में दान कर चुके हैं। बड़े भाई प्यारेलाल व स्वर्गीय शिवबालक राम हैं।