नई दिल्ली। बैंकों के निजीकरण और विलय के खिलाफ तथा बैंकों में सभी पदों पर भर्ती, अनुकंपा आधार पर नियुक्ति एवं नोटबंदी के दौरान किए गए अतिरिक्त काम के लिए ओवरटाइम दिए जाने जैसी मांगों को लेकर मंगलवार को सरकारी बैंककर्मियों की देशव्यापी ह़डताल से बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं और आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना प़डा। इस ह़डताल का आह्वान बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के संयुक्त संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने किया था। इसमें कर्मचारियों के पांच और अधिकारियों के चार संगठन शामिल हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने ह़डताल को सफल बताते हुए इसके लिए कर्मचारियों को बधाई दी हसार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण और एकीकरण के विरोध में मंगलवार को बैंकों की देशव्यापी ह़डताल का असर कर्नाटक में भी देखने को मिला और ग्राहकों को भारी परेशानी झेलनी प़डी। केन्द्र सरकार की मौद्रिक नीति और बैंकिंग उद्योग तथा श्रम कानूनों में सुधार के खिलाफ फेडरेशन ऑफ बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन (एफबीआईओए) ने राष्ट्रीय बंद का आह्वान किया था। बैंक कर्मचारियोंने बेंगलूरु सहित राज्य के विभिन्न शहरों में प्रदर्शन किया और धरना दिया। उन्होंने केन्द्र सरकार की नीतियों को श्रमिक विरोधी करार दिया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार बंद के कारण राज्य में कहीं से किसी प्रकार की अप्रिय घटना की खबर नहीं है।