रक्षा मंत्रालय की जांच में आदर्श घोटाले में दो पूर्व जनरल के नाम सामने आए

आदर्श घोटाला

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नई दिल्ली। मुंबई के आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाला मामले में रक्षा मंत्रालय की तरफ से नियुक्त उच्च स्तरीय समिति ने अपनी जांच में सेना के दो पूर्व प्रमुखों (जनरल एनसी विज और जनरल दीपक कपूर) तथा कई अन्य सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों की संलिप्तता पाई है। जांच समिति ने अपने सौ पन्ने की रिपोर्ट में तीन सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल जीएस सिहोता, तेजिंदर सिंह और शांतनु चौधरी तथा चार मेजर जनरल एआर कुमार, वीएस यादव, टीके कौल और आरके हुड्डा के नामों का भी जिक्र किया है। इसने कई अनियमितताओं का जिक्र किया है। जांच के मुताबिक प्रतीत होता है कि जनरल विज ने जांच के दायरे में आई जमीन के लिए किसी भी चरण में कोई सवाल नहीं उठाए और न ही उन्होंने वार्षिक सुरक्षा समीक्षा के दौरान कोई सुरक्षा चिंता जाहिर की। सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट के मुताबिक यह पता चला कि उनका इस मामले में निहित स्वार्थ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल कपूर भले ही मामले में सीधे जु़डे हुए नहीं थे लेकिन सोसाइटी की सदस्यता हासिल करने में उन्हें ठीक से सलाह नहीं दी गई। इसमें कहा गया है कि परिसर में फ्लैट लेने के परिणाम पर उन्होंने गहनता से विचार नहीं किए। भारतीय नौसेना ने सुरक्षा चिंताएं जताई थीं क्योंकि भवन से इसके कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान सीधे नजर आते थे। भवन परिसर का निर्माण रक्षा मंत्रालय की जमीन किया गया था और इसमें कारगिल युद्ध के नायकों और युद्ध में अपने परिजनों को गंवाने वालों को लाभ मिलना था। रक्षा मंत्रालय की जांच में सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों को दोषी पाया गया और इसमें कहा गया है कि जिन लोगों को घोटाले में संलिप्त पाया गया या अनियमितताओं की तरफ से जिन लोगों ने आंखें मूंद रखी थीं उन्हें किसी भी रोजगार या सरकार की सेवा में नहीं लगाया जाना चाहिए!मुंबई में बनाए गए अपार्टमेंट कारगिल के नायकों के परिजनों के लिए थे लेकिन नियमों का उल्लंघन कर सैन्य अधिकारियों, नेताओं और नौकरशाहों को कथित तौर पर फ् लैटों के आवंटन किए गए। वर्ष 2010 में सामने आने के बाद आदर्श घोटाला भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गया और इससे एक बड़ा राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ था। घोटाले के कारण महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को इस्तीफा देना पड़ा था।