हिसार। एक स्थानीय अदालत ने स्वयंभू बाबा रामपाल को दंगा करने, गैर कानूनी रूप से एकत्र होने और बल के प्रयोग से संबिधित दो मामलों में आज बरी कर दिया लेकिन वह जेल से बाहर नहीं निकल पाएगा क्योंकि वह हत्या सहित अन्य आरोपों का सामना कर रहा है। हिसार केंद्रीय जेल के भीतर लगाई गई अदालत में न्यायिक मजिस्ट्रेट मुकेश कुमार ने सतलोक आश्रम, बरवाला के ६६ वर्षीय प्रमुख रामपाल और उनके अनुयायियों को सबूत के अभाव में राहत प्रदान की। अदालत कथित हमला, सरकारी कामकाज के निर्वहन में लोक सेवक को बाधा डालने, जानबूझकर लोकसेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन में चोट पहुंचाने, लोक सेवक को उसका कर्तव्य पूरा करने से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग के मामले की सुनवाई कर रही थी। रामपाल के वकील एपी सिंह ने अदालत के बाहर मीडिया को बताया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ अन्य मामलों में सुनवाई जारी रहेगी। अदालत के बरी करने के बावजूद रामपाल जेल से बाहर नहीं आ पाएगा और उसके खिलाफ अन्य मामलों में सुनवाई जारी रहेगी। रामपाल और उसके कुछ समर्थकों के खिलाफ ये दो मामले भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज नवम्बर २०१४ में दर्ज किए गए थे जब पुलिस उसे एक मामले में गिरफ्तार करने सतलोक आश्रम गई थी लेकिन वहां उसे समर्थकों के जबरदस्त विरोध का सामना करना प़डा था। वर्ष २०१४ में बरवाला में १२ एक़ड में फैले सतलोक आश्रम परिसर से रामपाल के १५००० से ज्यादा अनुयायियों को खाली कराने को लेकर उसके कुछ समर्थकों और पुलिस के बीच तनावपूर्ण गतिरोध के बाद रामपाल को गिरफ्तार किया गया था।