चेन्नई। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद तथा चीन सागर क्षेत्र में चीन द्वारा वर्चस्व स्थापित करने की कोशिशों से दक्षिण पूर्व एशिया में पनपे भूराजनीतिक संकट के बीच अमेरिका, जापान और भारत ने परस्पर मजबूत रक्षा सहयोग का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए सोमवार से बंगाल की खा़डी में अपना संयुक्त मालाबार नौसैनिक अभ्यास शुरू कर दिया। सत्रह जुलाई तक चलने वाले इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य तीनों देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्र मे चलाए जाने वाले सुरक्षा अभियानों में बेहतरीन आपसी समझ और समन्वय विकसित करना है। इस बार इस अभ्यास में मुख्य रूप से विमान वाहक पोतों, हवाई सुरक्षा, मिसाइल रोधी और पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली तथा बचाव और राहत के लिए चलाए जाने वाले संयुक्त प्रयासों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। भारत की ओर से इस अभ्यास में आईएनएस विक्रांत, मिसाइल विध्वंसक प्रणाली से लैस पोत रणवीर, स्वदेश निर्मित स्टील्थ फ्रिगेट शिवालिक और सहयाद्री, मिसाइलों से लैस पोत कोरा और कृपाण, सिंधुघोष श्रेणी की एक पनडुब्बी,आईएनएस ज्योति और लंबी दूरी तक उ़डान भरने में सक्षम गश्ती विमान पी आठ आई हिस्सा ले रहे हैं। अमेरिका का प्रतिनिधित्व अमरीका के सातवें नौसैनिक बे़डे का अहम युद्धक पोत निमित्ज, क्रूज मिसाइलों से लैस पोत प्रस्िंटन, मिसाइल रोधी प्रणाली से युक्त यूएसएस हावर्ड, यूएसएस शूप और यूएसएस किड कर रहा है। इनके साथ ही लॉस एंजिलिस फास्ट ट्रैक पनडुब्बी और गश्ती विमान पी आठ ए भी अमेरिका की शान ब़ढा रहे हैं। जापान ने अभ्यास में अपने रक्षक युद्धपोत जेएस इजूमो और और जेएस साजानामी को भेजा है। उसके कुछ समुद्री गश्ती विमान भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास के दौरान तीनों नौसेनाओं के बीच राहत और बचाव अभियानों में समन्वय के साथ ही युद्ध की स्थितियों में भी परस्पर सहयोग करने के तरीकों का विशाखापट्टनम में शानदार प्रदर्शन किया जाएगा।