बेंगलूरु। शहर की स़डकों पर वाहनों के भारी दबाव और जाम के कारण यातायात में पेश आने वाली दिक्कतों से शहरवासियों को निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार की सब-अर्बन रेलवे परियोजना को केंद्र सरकार मदद देगी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रविवार को रेलवे अधिकारियों को इस परियोजना के तकनीकी पहलुओं पर ध्यान देने और इससे जु़डीं समस्याओं का समाधान करने का निर्देश दिया है। उन्होंने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुब्बल्ली-तोरंगल रेल खंड पर विभिन्न रेलवे परियोजनाओं का उदघाटन किया। इसी दौरान उन्होंने दावा किया कि केंद्र की तरफ से बेंगलूरु सव-अर्बन रेल परियोजना को पूरी मदद दी जाएगी। रेलवे के उच्चाधिकारियों के साथ एक बैठक में वह इस परियोजना की समीक्षा भी कर चुके हैं। प्रभु ने कहा कि कर्नाटक सरकार विभिन्न रेल परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए केंद्र के साथ पूरा सहयोग कर रही है।रेल मंत्री ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने कर्नाटक में रेल परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पूर्व की केंद्र सरकारों की अपेक्षा अधिक मदद दी है। वित्त वर्ष २०१४-१४ में राज्य को ७८३ करो़ड रुपए का अनुदान दिया गया, जबकि वर्ष २०१५-१६ में १७८१ करो़ड और वर्ष २०१६-१७ में २५६७ करो़ड रुपए का अनुदान कर्नाटक को मिला है। राज्य में वित्त वर्ष २०१७-१८ के दौरान ३१७४ करो़ड रुपए की परियोजनाओं का काम शुरू किया जाएगा।उन्होंने कहा कि वह भारतीय रेल के आधुनिकीकरण पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। देश की सभी रेललाइनों को ब्रॉडगेज बनाने, सभी पटरियों के लिए बिजली आपूर्ति करने, पुराने रेल डिब्बों के स्थान पर नए डिब्बे जो़डने और ट्रेनों की रफ्तार ब़ढाने का काम फिलहाल जारी है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनके विभाग में अब भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं रह गई है। विभाग के काम-काज में पारदर्शिता के लिए उठाए गए कदमों के कारण रेलवे एक स्वच्छ संस्थान में तब्दील हो चुका है।रेलवे के राजस्व में ब़ढोत्तरी के उपायों के बारे में बोलते हुए प्रभु ने कहा कि वह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित की जानेवाली परियोजनाओं पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस मॉडल के आधार पर एक लाख करो़ड रुपए की परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनसे रेल यात्रियों को यात्रा के दौरान अधिक सुविधाएं मिलेंगी और यात्रा का सुखद अनुभव भी होगा। रेल परियोजनाओं के उदघाटन कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री डीवी सदानंद गौ़डा ने रेल मंत्री से अपील की कि वह सब-अर्बन रेल परियोजना में ८०:३० के अनुपात में निर्धारित भागीदारी के फॉर्मूले पर दोबारा गौर करेंं्। उन्होंने कहा कि इस भागीदारी अनुपात से राज के खजाने पर भारी दबाव आएगा। चूंकि राज्य सरकार को परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का बोझ भी वहन करना है, इसलिए भागीदारी के अनुपात पर दोबारा विचार करने की जरूरत है।