नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने भारतीय प्रतिभूति नियामक बोर्ड (सेबी) के साथ विवाद में सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय को सोमवार को फौरी राहत प्रदान करते हुए उनकी पैरोल अवधि आगामी पांच जुलाई तक ब़ढा दी। न्यायालय ने, हालांकि सहारा प्रमुख को आगाह किया कि यदि वह चार जुलाई तक ७०९ करो़ड ८२ लाख रुपए जमा नहीं कराएंगे तो उन्हें जेल जाना प़डेगा। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अवकाशकालीन पीठ ने अपने आदेश में कहा, यदि शेष राशि निर्धारित अवधि (चार जुलाई) तक जमा नहीं कराई जाती है तो अवमाननाकर्ता (सुब्रत राय) को फिर से तिहा़ड जेल जाना प़डेगा। सहारा प्रमुख की ओर से जिरह कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने अदालत से अपने आदेश की उक्त पंक्ति को हटाने का यह कहते हुए विशेष अनुरोध किया कि उनके मुवक्किल अदालत कक्ष में मौजूद हैं और वह ईमानदारी पूर्वक शेष राशि आगामी १० कार्यदिवस के भीतर जमा करा देंगे, लेकिन न्यायमूर्ति मिश्रा ने यह वाक्य काटने से मना कर दिया। न्यायालय ने कहा, सीधा फॉर्मूला है, रुपए जमा कराइए। भुगतान कीजिए और जेल से निकल जाइए। इससे पहले सिब्बल ने पीठ को अवगत कराया कि सहारा समूह ने सेबी को अभी तक कुल ७९० करो़ड १८ लाख रुपए जमा कराए हैं, जिसमें १६ करो़ड ११ लाख ९५ हजार रुपए का डिमांड ड्रॉफ्ट शामिल है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सहारा समूह ने लंदन स्थित अपने होटल ’’ग्रोजवेनर हाउस’’ के शेयर जीएच इक्विटी यूके लिमिटेड से बेचे हैं और १० दिन में पैसे आने वाले हैं। न्यायालय ने सिब्बल का आग्रह मानते हुए सहारा समूह को शेष राशि जमा कराने के लिए १० और कार्यदिवस दे दिए। इसके साथ ही राय एवं उनके दो अन्य निदेशकों की पैरोल अवधि पांच जुलाई तक ब़ढ गई। राय एवं दोनों निदेशकों की पैरोल अवधि सोमवार को समाप्त हो रही थी। न्यायालय ने सहारा समूह को उत्तराखंड के हरिद्वार की ८७.०३ एक़ड जमीन की ई-नीलामी को भी मंजूरी दे दी।