मुनीर के मन में क्या?

निस्संदेह भारत अपने हर पड़ोसी देश के साथ मधुर संबंध चाहता है

आसिम मुनीर के लिए रास्ता आसान नहीं है

पाकिस्तानी सेना प्रमुख का पदभार संभाल चुके जनरल आसिम मुनीर अब इस पड़ोसी देश को दिशा देने की स्थिति में आ गए हैं। पाक में सेना प्रमुख ही सबसे ताकतवर शख्स होता है। वह चाहे तो अपनी जनता का भला कर सकता है और चाहे तो उन्हें तबाही में धकेल सकता है, जिस प्रकार पूर्व में सेना प्रमुख धकेलते आए हैं। मुनीर की नियुक्ति की घोषणा के साथ ही कई तरह के सवाल चर्चा में हैं, जिनके संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है। 

मीडिया में एक वर्ग ज्यादा ही आशावान हो रहा है। उसे लगता है कि मुनीर के आने से भारत-पाक संबंधों में बेहतरी आएगी। निस्संदेह भारत अपने हर पड़ोसी देश के साथ मधुर संबंध चाहता है, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि ये वही आसिम मुनीर हैं, जो पुलवामा हमले के मास्टर माइंड माने जाते हैं। उनके आईएसआई प्रमुख रहते कश्मीर में घुसपैठ और आतंकवाद से संबंधित घटनाओं में तेजी देखी गई थी। उनका झुकाव कट्टरपंथ की ओर रहा है, लिहाजा यही सब उनके कामकाज में दिखाई दे सकता है। 

यूं भी पाकिस्तान की भारत नीति से सब परिचित हैं। वहां सेना प्रमुख कोई भी आए, इस नीति में खास बदलाव नहीं होता है। भारत को अपनी शक्ति, सूझबूझ और संसाधनों से अपनी समस्याओं का स्वयं समाधान करना होगा। आतंकवाद का समूल खात्मा, उनके हिमायती तत्त्वों पर नियंत्रण और शांति स्थापना के लिए खुद ही नए-नए विकल्प ढूंढ़ने होंगे, प्रभावी नीतियां बनानी होंगी। अगर इसके लिए अन्य देशों के अनुभवों से लाभ ले सकें तो जरूर लेना चाहिए।

आसिम मुनीर के लिए रास्ता आसान नहीं है। उनके कुर्सी संभालते ही टीटीपी ने एलान कर दिया कि वे देशभर में धमाके करेंगे। उन्होंने बुधवार को शुरुआत भी कर दी, जिसमें चार लोग मारे गए और करीब दो दर्जन घायल हो गए। आने वाले दिनों में पाक में आतंकवाद की नई लहर आ सकती है, जिस प्रकार पूर्व में आतंकवादियों ने स्वात के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। 

मुनीर को सबसे पहले तो खुद के पाले हुए इन भस्मासुरों से निपटना होगा। उसके बाद इमरान खान उनके लिए बड़ा सिरदर्द बनने वाले हैं। इमरान के चहेते ले. जनरल फैज हमीद थे, लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि उन्हें इस्तीफा देकर जाना पड़ा। वे इमरान के साथ पीटीआई में शामिल हो सकते हैं। मुनीर ने इमरान की पत्नी के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया था, जिसके बाद पीटीआई प्रमुख के साथ उनका छत्तीस का आंकड़ा बना हुआ है। उन्होंने मुनीर को पद से हटा दिया था। अब इमरान की बाजवा से तनातनी के बीच मुनीर के भाग्य जाग उठे। 

बाजवा ने उन्हें इसलिए सेना प्रमुख बनाया है, ताकि वे भविष्य में इमरान से पुराना हिसाब चुकता करें और मुसीबत खड़ी करते रहें। चूंकि पाकिस्तान में अगले साल आम चुनाव होने हैं, इसलिए चुनावी माहौल में भारी सियासी घमासान होना तय है। इमरान अपनी चिर-परिचित शैली में खुद को ईमानदार, देशप्रेमी और सच्चा साबित करने की कोशिश करेंगे। साथ ही सेना पर जमकर प्रहार करेंगे। 

भारत के लिए यह इसलिए खास एहतियात का समय है, क्योंकि चुनावी साल में मुनीर जनता का ध्यान हटाने के लिए आतंकवाद और भारत-विरोध को हवा दे सकते हैं, जिससे निपटने के लिए भारतीय सेना, सशस्त्र बलों और खुफिया एजेंसियों को बहुत सतर्क रहना होगा।

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