चेन्नई/दक्षिण भारत। परिसीमन पर पहली संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) की बैठक शनिवार को यहां तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन की अध्यक्षता में शुरू हुई।
बैठक में कम से कम पांच राज्यों के 14 नेता भाग लेंगे और वे उच्च आर्थिक विकास और साक्षरता वाले राज्यों के लिए लोकसभा सीटों के परिसीमन से उत्पन्न 'खतरे' पर विचार-विमर्श करेंगे।
बैठक में भाग लेने वाले नेताओं में केरल, तेलंगाना और पंजाब के मुख्यमंत्री क्रमश: पी विजयन, रेवंत रेड्डी और भगवंत मान शामिल हैं।
विपक्षी भाजपा ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया और स्टालिन पर कर्नाटक एवं केरल के साथ कावेरी और मुल्लापेरियार जल बंटवारे के विवादों पर ऐसी ही बैठकें न बुलाने का आरोप लगाया। भाजपा नेता तमिलिसाई सौंदराजन ने इस बैठक को संबंधित नेताओं द्वारा भ्रष्टाचार छिपाने वाली बैठक बताया।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा, 'किसी भी कीमत पर हम अपने देश और अपनी सीटों को कम नहीं होने देंगे।'
उन्होंने दावा किया कि दक्षिण भारत ने हमेशा जनगणना नियमों और परिवार नियोजन नीतियों को बरकरार रखा है, जिससे यह एक प्रगतिशील क्षेत्र बन गया है। उन्होंने यहां आने पर कहा, 'आर्थिक रूप से और साक्षरता के मामले में, हमने हमेशा आगे बढ़कर काम किया है। हमने हमेशा राष्ट्रीय हित की रक्षा की है, न कि केवल अपने हित की।'
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने बैठक पर कहा कि द्रमुक परिसीमन का नाटक द्रमुक के भ्रष्ट, असफल, विनाशकारी कुशासन से जनता का ध्यान हटाने के लिए एक विभाजनकारी रणनीति के रूप में कर रहा है।
केसवन ने कहा, 'डर फैलाने, लोगों को गुमराह करने और गलत सूचना देने की द्रमुक की विभाजनकारी राजनीति द्रमुक पर ही उलटी तरफ पलटेगी। राहुल गांधी और कांग्रेस परिसीमन पर अपने परस्पर विरोधी और विरोधाभासी रुख के साथ अवसरवाद की बहुत ही दयनीय राजनीति में लिप्त हैं, जो पूरी तरह से निंदनीय है।'
तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ भाजपा नेता तमिलिसाई सौंदराजन ने कहा कि काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन तमिलनाडु के लोगों के हितों की रक्षा के लिए था।