मोहाली/दक्षिण भारत। पंजाब के मोहाली की अदालत ने साल 2018 के दुष्कर्म मामले में पादरी बजिंदर सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीएसजे) विक्रांत कुमार की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
बजिंदर को 28 मार्च को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के लिए सजा) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दोषी ठहराया गया था।
बजिंदर सिंह की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, उसका जन्म 10 सितंबर, 1982 को हुआ था। उसने दावा किया कि उसे आठवीं कक्षा से ही कुछ बुरी शक्तियां परेशान करने लगी थीं, जिसके कारण स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया था।
उसके अनुसार, 'मैं गलत संगति में चला गया और चार-पांच साल तक मैंने कई लोगों को पीटा, मेरा स्वभाव ऐसा हो गया था। एक बड़े झगड़े की वजह से डेढ़ साल जेल में रहा। फिर मैंने भगवान को खोजना शुरू किया। मैंने आत्महत्या करने की भी कोशिश की थी।'
बजिंदर ने दावा किया, 'मेरे माता-पिता और रिश्तेदार भी मुझसे अलग हो गए थे, इसलिए मैं डिप्रेशन के कारण मरने के बारे में सोचता था और रात को मुझे बहुत डर लगता था। मैं पूरी रात जागता रहता था। जब मुझे डर लगता था तो मैं सभी भगवानों का नाम लेता था। फिर किसी ने मुझे एक पवित्र ग्रंथ की प्रति दी।
उसने कहा, 'एक पादरी ने मेरे लिए प्रार्थना की। फिर मैं उपवास करता रहा और प्रार्थना करता रहा कि प्रभु मुझे दर्शन दें और मुझे निजात मिल गई।