रजनीकांत कर सकते हैं प्रधानमंत्री से मुलाकात

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चेन्नई। रजनीकांत ने अपने राजनीति में आने को लेकर जिस प्रकार संकेत दिया है उसके बाद तरह-तरह की अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। विभिन्न राजनीतिक पार्टियां जहां उनके इस प्रकार के संकेतों का स्वागत कर रही है और उन्हें अपनी पार्टी में आने के लिए आमंत्रित कर रही हैं वहीं राजनीकांत ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनका अगला निर्णय क्या होगा। हालांकि इतना तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह राज्य की दो द्रवि़ड पार्टियों मंें शामिल नहीं होंगे और यही कारण है कि विभिन्न पार्टियां उन्हें अपने पाले में करने के लिए रिझाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि इन सबके बीच इस प्रकार के कयास लगाए जा रहे हैं कि रजनीकांत भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। अगर यह सही हुआ तो तमिलनाडु की राजनीति में नए आयाम देखने को मिलेंगे। अपुष्ट खबरों के मुताबिक रजनीकांत जल्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। पिछले सप्ताह अपने चहेते अभिनेता से मिलने यहां जमा हुए प्रशंसकों के बीच उस समय उत्साह देखने को मिला जब रजनीकांत ने उनसे कहा कि ’’जंग’’ के लिए तैयार रहिए। इसे उनके राजनीति में जाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ज्ञातव्य है कि तमिलनाडु की राजनीति में कई फिल्मी कलाकार अपनी किस्मत आजमा चुके हैं और वह काफी सफल भी हुए हैं। जयललिता के निधन के बाद आई राजनीतिक शून्यता की स्थिति में रजनीकांत की यह टिप्पणी सही समय में की गई मानी जा रही है। रजनीकांत के प्रशंसकों को लगता है कि उनके ’’तलाइवा’’ या नेता इस खालीपन को भर सकते हैं। हालांकि रजनीकांत के राजनीति में आने की संभावना को लेकर अन्य दलों के नेता इतने उत्साहित नहीं लगते। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने कहा, ’’तमिलनाडु को किसी अभिनेता की नहीं बल्कि प़ढे-लिखे इंसान की जरूरत है।’’ इसके साथ ही सुब्रमणियम स्वामी ने भी उनके इस बयान की आलोचना की थी। मराठी मूल के और कर्नाटक से तमिलनाडु में आकर बसे रजनीकांत खुद को सच्चा तमिल बताते हैं। उन्होंने कहा, ’’मैं कर्नाटक से हूं फिर भी आपने मुझे स्वीकार किया और आपने मुझे तमिलियन बना दिया। मैं अब विशुद्ध रुप से तमिल हूं्।’’ रजनीकांत ने कहा था, ’’अगर आप मुझसे बाहर जाने के लिए कहोगे और निकाल फेंकोगे तो मैं केवल हिमालय ही जाऊंगा और अन्य किसी राज्य में नहीं जाऊंगा।’’ रजनीकांत के राजनीति में जाने की अटकलें कई वर्षों से चलती रहीं हैं। वर्ष १९९६ में जब उन्होंने जयललिता को वोट नहीं देने का आह्वान जनता से किया था, तब भी उनके राजनीति में जाने की अटकलें चली थीं। उस चुनाव में जयललिता विधानसभा चुनाव हार गई थीं और द्रमुक ने जबरदस्त जीत हासिल की थी। तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष एस. तिरुनावक्करासर ने रविवार को कहा कि उनका मानना है कि तमिल फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत किसी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय पार्टी में शामिल नहीं होंगे, बल्कि अपनी खुद की पार्टी बनाएंगे। उन्होंने कहा, ’’पिछले ३५-४० साल से परिचित एक मित्र के तौर पर मेरा मानना है कि वह किसी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय पार्टी में शामिल नहीं होंगे। वह अपनी खुद की पार्टी बनाएंगे।’’ उनका बयान उस वक्त आया है जब रजनीकांत ने राजनीति में आने के संकेत दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी उनको लुभाने के प्रयास किए गए हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि अगर रजनीकांत अपनी खुद की पार्टी बनाते हैं तो गठबंधन के बारे में फैसला उन्हीं को करना होगा।