कांग्रेस, शिवसेना एवं राकांपा
कांग्रेस, शिवसेना एवं राकांपा

मुंबई/भाषा। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे नीत गठबंधन सरकार में विभागों के आवंटन में कांग्रेस को महत्वपूर्ण विभाग नहीं मिलने को लेकर पार्टी की प्रदेश इकाई असंतोष का सामना कर रही है। पार्टी नेताओं का एक हिस्सा शिवसेना और राकांपा की तुलना में कम महत्वपूर्ण विभाग मिलने के लिए पार्टी के प्रदेश प्रमुख बालासाहेब थोराट को जिम्मेदार ठहरा रहा है।

उनकी नाराजगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार से भी है, जो गठबंधन में एक अहम संयोजक बन कर उभरे हैं। कांग्रेस के एक नेता ने दावा किया कि उन्हें प्रदेश इकाई में एक ऐसे नेता की जरूरत है, जो पवार के सामने टिक सकें।

कांग्रेस के कुछ नेताओं ने कहा कि उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास, उद्योग, आवास, परिवहन और सहकारिता की सूची में से कम से कम दो विभाग मांगे थे लेकिन सहयोगी दल शिवसेना और राकांपा ने इस पर ध्यान देने से इनकार कर दिया।इसके बजाय संस्कृति, नमक भूमि और बंदरगाह विकास जैसे मंत्रालय कांग्रेस को दिए गए, जो पहले शिवसेना के पास थे।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम जाहिर नहीं किये जाने की शर्त पर कहा, गठबंधन में शामिल तीनों दलों के बीच सत्ता साझेदारी में कांग्रेस को समुचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। थोराट सत्ता-साझेदारी पर चर्चा के दौरान कांग्रेस की रूचि को सामने रखने में सक्षम नहीं रहे।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेता नितिन राउत लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) अपने वरिष्ठ साथी एवं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को दिये जाने और थोराट को राजस्व विभाग आवंटित किए जाने से नाखुश हैं। राउत को ऊर्जा मंत्री बनाया गया है।

कांग्रेस के एक नेता ने पार्टी के अंदर व्याप्त कथित असंतोष का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ करना और पार्टी के एक महासचिव का पुतला फूंकना पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा, इस तरह की अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेने की जरूरत है।

कांग्रेस विधायक संग्राम थोपटे के कथित समर्थकों ने उन्हें (थोपटे को) राज्य मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने को लेकर पुणे में 31 दिसंबर को पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की थी। इसके अलावा, विधायक प्रणीति शिंदे को मंत्री पद नहीं दिए जाने को लेकर नाखुश पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने सोलापुर में कांग्रेस महासचिव मल्लिकार्जुन खरगे का पुतला फूंका।

संपर्क किए जाने पर महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व प्रमुख माणिकाव ठाकरे ने कहा, दोनों विधायकों (थोपटे और शिंदे) का इन घटनाओं से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस के साथ हैं और नेतृत्व के फैसले का पालन करते हैं।

इस बीच, पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल को पत्र लिखकर पार्टी में अनुशासन नहीं होने के बारे में शिकायत की। पदाधिकारी ने लिखा है, कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता इसलिए नाखुश हैं कि पार्टी के ज्यादातर फैसले राकांपा प्रमुख शरद पवार के साथ चर्चा करने के बाद लिए गए। यह बहुत खतरनाक है।

उन्होंने हालिया अहमदनगर जिला परिषद् चुनाव का भी उदाहरण दिया जिसमें कांग्रेस के 23 और राकांपा के 18 सदस्य थे। कांग्रेस पदाधिकारी ने कहा कि इसके बावजूद थोराट ने कांग्रेस को उपाध्यक्ष पद से संतोष करने दिया और जिला परिषद् अध्यक्ष का पद राकांपा को दे दिया।

कांग्रेस के एक अन्य नेता ने कहा कि त्रिदलीय गठबंधन सरकार के तहत शिवसेना और राकांपा अपनी कैडर क्षमता को मजबूत करेगी और उसे संगठनात्मक रूप से बेहतर बनाएगी लेकिन सोनिया गांधी नीत पार्टी (कांग्रेस) को भी पीछे नहीं छूटना चाहिए।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र कांग्रेस को एक ऐसे प्रमुख की जरूरत है जो पवार के सामने टिक सके ताकि हम राज्य में गुम नहीं हो जाएं। हालांकि, थोराट के एक करीबी नेता ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश प्रमुख पार्टी के लिए सर्वश्रेष्ठ हासिल करने में कामयाब रहे और इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि 288 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के महज 44 विधायक हैं।

महाराष्ट्र में विभागों के आवंटन के तहत उपमुख्यमंत्री एवं राकांपा के वरिष्ठ नेता अजित पवार को वित्त एवं योजना विभाग दिया गया है, जबकि राकांपा के ही अनिल देशमुख राज्य के नए गृह मंत्री बनाए गए हैं । इसके अलावा, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे और पहली बार विधायक बने शिवसेना के आदित्य ठाकरे को पर्यावरण, पर्यटन एवं प्रोटोकॉल विभागों का प्रभार सौंपा गया है।

कांग्रेस के प्रदेश प्रमुख बालासाहेब थोराट को राजस्व मंत्रालय मिला है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के ही अशोक चव्हाण को लोक निर्माण विभाग (जिसमें सार्वजनिक उपक्रम शामिल नहीं हैं) दिया गया। शरद पवार नीत राकांपा को मिले ज्यादातर विभाग महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।