सरदार पटेल के मार्ग पर अग्रसर प्रधानमंत्री मोदी

जी. किशन रेड्डी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने सबसे हालिया मन की बात’ कार्यक्रम में कश्मीर के पुलवामा जिले के एक गांव ओखू की कहानी पर प्रकाश डाला। आज, ओखू पेंसिल स्लैटस बनाने के लिए जाना जाता है और यह अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत में बनने वाली लगभग 60% पेंसिल ओखू में बनाई जाती हैं। सरकार से सही तरह से समर्थन और प्रोत्साहन मिलने के साथ ओखू के निवासी घरेलू इकाइयां स्थापित करने में सक्षम हुए हैं जिनमें वो पेंसिल स्लैटस बनाते हैं। इस माध्यम से वह लोग अपने क्षेत्र में ही नौकरी और आय पैदा कर रहे हैं।

31 अक्टूबर 2019 को जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश के रूप में गठित होने के एक साल बाद, जम्मू और कश्मीर ऐसी कई ओखू की सफल कहानी बन रहा है। जम्मू कश्मीर से संविधान की स्थाई व्यवस्था धारा 370 को प्रभावी रूप से हटाना मोदी सरकार द्वारा सरदार पटेल के सपने को पूरा करने जैसा था जिन्होंने एक संप्रभु राष्ट्र बनाने के लिए अथक प्रयास किया था और जिनके मार्गदर्शन और कुशल नेतृत्व के कारण ही भारत के अलग अलग क्षेत्रों और रियासतों को एक संविधान के अंदर लाया जा सका था। मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक निर्णय ने डॉ. अंबेडकर की एक राष्ट्र, एक संविधान’ की विचारधारा को भी ज़मीन पर उतारा है। हमारे आदर्श डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने तो जम्मू कश्मीर को भारत से सही मायनों में जोड़ने के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे दी।उनका बलिदान ही हमारी सरकार को देश की अखंडता को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। कश्मीर का समग्र एकीकरण अब क्षेत्र में परिवर्तनकारी विकास के साथ हो रहा है जिसमें आम कश्मीरी नागरिकों की भागीदारी सबसे ज़्यादा देखने को मिल रही है।

कश्मीर विशिष्ट कार्यक्रम, जैसे कि राष्ट्रीय केसर मिशन, जिसका उद्देश्य केसर की खेती के लिए 3,500 हेक्टेयर भूमि का कायाकल्प करना है, इस क्षेत्र के किसानों को सेब और अन्य फलों के उच्च घनत्व वाले वृक्षारोपण की शुरुआत करने के लिए प्रोत्साहित करना और युद्ध-स्तर पर बिजली, पानी एवं सड़क जैसे रोजमर्रा के मुद्दों को संबोधित करना आदि मोदी सरकार के कुछ ऐसे कार्य हैं जिन्होंने क्षेत्र के नागरिकों को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। उड़ान योजना के तहत जम्मू और कश्मीर में 11 और लद्दाख में दो हवाई अड्डों की स्थापना के साथ कनेक्टिविटी बढ़ाई जा रही है ताकि व्यापार, पर्यटन शिक्षा, और स्वास्थ्य सुविधाओं को व्यापक रूप से बढ़ावा मिल सके। दो एम्स अस्पताल और नौ नए मेडिकल कॉलेजों के उद्घाटन के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का प्रयास किया जा रहा है। देश के गरीबों के लिए वरदान साबित हो रही आयुष्मान भारत योजना’ अब जम्मू-कश्मीर के सभी निवासियों के लिए उपलब्ध है। सरकार द्वारा बिचौलियों को निष्प्रभावी बनाए जाने से क्षेत्र में आर्थिक एकीकरण और राजनीतिक संवाद को बल मिल है जो सुरक्षा बलों द्वारा चले जाने वाले आतंकवाद विरोधी अभियानों में नागरिक सहयोग को बढ़ाने के लिए अग्रणी है। जनता और सुरक्षा बलों के समन्वय का ही परिणाम है कि जम्मू-कश्मीर में कई जिले अब आतंकवाद-रोधी अभियानों के साथ आतंक-मुक्त हैं, जिन्हें समन्वित तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। मेरे गृह राज्य तेलंगाना में भी सरदार वल्लभभाई पटेल की निर्णायक भूमिका को आने वाली पीढ़ियों द्वारा बड़ी कृतज्ञता के साथ याद किया जाएगा। जबकि भारत का राष्ट्रीय ध्वज 15 अगस्त 1947 को पूरे देश में फहराया गया था, तत्कालीन रियासत हैदराबाद के बाशिंदों को यह सुख प्राप्त करने के लिए तेरह महीने और इंतजार करना पड़ा था।

ज्ञात रहे कि हैदराबाद रियासत की बागडोर उस समय के निज़ाम, मीर उस्मान अली खान के हाथ में थी जो बेहद अत्याचारी और हिन्दू विरोधी भावना से ग्रसित था। निजाम हैदराबाद को पाकिस्तान में मिलाना चाहता था, लेकिन सरदार ने उसके मंसूबों के ऊपर पानी फेर दिया। ऑपरेशन पोलो के तहत सरदार द्वारा पुलिस कार्रवाई का आदेश देने के साथ ही एक अथक संघर्ष के बाद पूरे हैदराबाद डेक्कन को 17 सितंबर 1948 को निज़ाम के शासन से मुक्त कराया जा सका। ऑपरेशन पोलो की आवश्यकता इस लिए पड़ गई क्योंकि हैदराबाद निजाम के सलाहकार जैसे कासिम रिज़वी, शुरुआत में हैदराबाद डेक्कन को एक स्वतंत्र इस्लामिक राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में विश्र्वास करते थे। इसे प्राप्त करने के लिए निज़ाम ने पुर्तगाल से मर्मोगा बंदरगाह खरीदने का प्रयास किया। इससे निज़ाम के प्रांत को समुद्र तक पहुँच मिल जाती और अगर वह एक एनक्लेव होता तो उसकी तुलना में उसे अपनी स्वतंत्रता को आगे बढ़ाने में अधिक लाभ मिलता। इसके अलावा रिजवी ने निज़ाम को 24,000 की नियमित सेना को बढ़ाने के लिए लगभग 150,000 एमआईएम के स्वयंसेवक प्रदान करके निज़ाम का समर्थन किया। ये स्वयंसेवक बाद में रजाकार बन गए जिन्होंने रियासत में भारी नरसंहार किया, जिसमें हिंदुओं को प्रमुख रूप से निशाना बनाया गया। रजाकरों ने गॉंवों में उत्पात मचाया, महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की, पुरुषों को मारा और दृष्टि में पड़ने वाली हर चीज़ को नष्ट कर दिया। यह गरीब आम नागरिक ही थे जो रजाकरों की हिंसा का निशाना बनें। इनके द्वारा की गई कुछ घटनाएं तो ऐसी थी कि जिससे इंसानियत भी शर्मसार हो जाए।

गौरतलब है कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने रंगापुरम और लक्ष्मीपुरम गॉंवों में रजाकारों के उत्पीड़न को दक्षिण भारत का जलियॉंवाला बाग’ बताया था। इतिहास में दर्ज है कि किस तरह से रजाकारों ने लोगों को पेड़ों से बांध दिया और बेरहमी से गोली मार दी, महिलाओं का सरेआम बलात्कार किया और उनके सोने और पैसे लूट लिए। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जब हम एक बार फिर से राष्ट्रीय एकता दिवस या सरदार वल्लभभाई पटेल की 145वीं जयंती को मनाएंगे, हमको यह चिंतन करना पड़ेगा कि हम सरदार के दिखाए मार्ग पर कितना आगे बढ़ पाए हैं और हमसे कहॉं कमी रह गई है? पटेल की भांति गुजरात से ही आने वाले देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरदार पटेल के अधूरे एजेंडे को पूरा करने के लिए दृढ़ता के साथ काम कर रहे हैं। एक ओर जहां सरदार पटेल के प्रयासों से देश का राजनीतिक एकीकरण हुआ, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राजनीतिक एकीकरण को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक भावनात्मक एकीकरण को प्राप्त किया जा रहा है।राजनीतिक एकीकरण से भावनात्मक एकीकरण तक की देश की यात्रा अब लगभग पूरी हो गई है। देश में सकारात्मक परिवर्तन की बयार चल चुकी है जिसके केंद्र में देश का आम नागरिक है। आर्थिक स्वतंत्रता के साथ राजनीतिक एकीकरण का समर्थन किया जा रहा है। एक नियम आधारित ढांचा बनाया जा रहा है, जिसमें सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है और कार्रवाई बिना किसी डर या पक्ष के की जाती है। मोदी सरकार में आर्थिक रूप से हाशिए पर खड़े वर्गों के उत्थान के प्रयास और वर्ग और जाति की सीमाओं को मिटाकर उनके लिए गरिमा और सामाजिक न्याय सुनिश्र्चित करने की प्रतिबद्धता पर काम तेजी से चल रहा है। अपने कार्यों के माध्यम से, प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार की विरासत को आगे बढ़ाया। स्टैचू ऑफ यूनिटी के अलावा जम्मू कश्मीर में धारा 370 को निष्प्रभावी करन मोदी जी की सरदार को सच्ची श्रद्धांजलि है।

(जी किशन रेड्डी भारत के गृह राज्य मंत्री
और सिकंदराबाद से संसद सदस्य हैं।)