नवजात शिशु.. सांकेतिक चित्र
नवजात शिशु.. सांकेतिक चित्र

सोशल मीडिया बोला- ‘कोटा के दोषियों’ को सजा दो

कोटा/दक्षिण भारत। राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले में राज्य की गहलोत सरकार घिरती जा रही है। मौतों का आंकड़ा कई सवाल तो खड़े करता ही है, इसके अलावा हालात काबू में न आने के कारण अस्पताल प्रशासन और राज्य सरकार को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ दो दिनों में ही नौ बच्चों की मौत हो गई। इससे जेके लोन अस्पताल में दिसंबर माह में दम तोड़ने वाले बच्चों की तादाद 100 तक पहुंच गई है। यह बड़ी संख्या है जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोग राजस्थान में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार के प्रयासों पर सवालिया निशान लगा रहे हैं, वहीं सियासी हलकों में भी आरोपों का दौर तेज होता जा रहा है।

अस्पताल द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2018 में यहां 77 बच्चों ने दम तोड़ा था। एक साल बाद इसी माह में बच्चों की मौतों में काफी इजाफा हुआ है जिसके पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं। इस संबंध में अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुरेश दुलारा बताते हैं कि यहां 30 दिसंबर को चार और 31 दिसंबर को जिन पांच बच्चों की मौत हुई, वे जन्म से ही कम वजन जैसी तकलीफों से ग्रस्त थे।

‘बुद्धिजीवी’ शांत क्यों?
राजस्थान सहित देशभर में सोशल मीडिया पर यूजर्स ने राजस्थान सरकार पर निशाना साधते हुए चिकित्सा विभाग की कार्यशैली को भी आड़े हाथों लिया। यूजर्स ने बच्चों की मौत को बेहद दुखद बताते हुए अगस्त 2017 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित अस्पताल में बच्चों की मौत का मामला उठाया, जब बुद्धिजीवियों एवं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रदेश की भाजपा सरकार को जमकर खरी-खोटी सुनाई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे की मांग की। वहीं, राजस्थान में मासूमों की मौत का आंकड़ा 100 तक पहुंचने के बाद भी ‘बुद्धिजीवी’ शांत हैं।

स्वास्थ्य मंत्री की दलील
राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बच्चों की मौत पर दुख जताया और कहा कि कई बच्चे काफी गंभीर अवस्था में अस्पताल लाए गए थे। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की है और जो भी बच्चा बचाए जाने की स्थिति में था, उसे बचाया गया।

पूनिया का प्रहार
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर प्रहार करते हुए कहा, अभी तो सरकार खुद हिम्मत नहीं जुटा पा रही कि वहां जाए। सरकार का कोई चिकित्सा मंत्री या वहीं के कैबिनेट मंत्री का अस्पताल नहीं जाना अफसोसजनक है। मुख्यमंत्री का रवैया चौंकाने वाला है क्योंकि उन्हें राजस्थान का गांधी कहा जाता है और उनकी संवेदनशीलता की मिसाल दी जाती है।

उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी बच्चों की मौत पर सियासत कर रही है। हमारे तीन-तीन प्रतिनिधिमंडल वहां गए। हम बच्चों की मौत पर राजनीति नहीं कर रहे, लेकिन सरकार को चेत जाना चाहिए। इतना होने के बावजूद सरकार चेती नहीं जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

कोटा इतनी दूर भी नहीं…
भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कोटा इतनी दूर भी नहीं है कि सोनिया और राहुल गांधी वहां नहीं जा सकें। उन्होंने कहा कि एक महीने में 100 नवजात शिशुओं की मौत हो जाती है और राजस्थान के मुख्यमंत्री से कोई सवाल नहीं पूछा जाता … यह घटना इतनी भी मामूली नहीं कि मीडिया कांग्रेस सरकार की इस लापरवाही पर आंख मूंद ले।

कांग्रेस के रवैए को बसपा ने बताया नाटकबाजी
बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस घटना पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘कांग्रेस शासित राजस्थान के कोटा जिले में लगभग 100 मासूम बच्चों की मौत से मांओं की गोद उजड़ना अति-दुखद व दर्दनाक है, तो भी सीएम गहलोत एवं उनकी सरकार इसके प्रति अभी भी उदासीन, असंवेदनशील व गैर-जिम्मेदार बने हुए हैं, जो अति-निंदनीय है।’

मायावती ने कहा, ‘किंतु उससे भी ज्यादा अति दुखद है कि कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व व खासकर महिला महासचिव की इस मामले में चुप्पी साधे रखना। अच्छा होता कि वे उप्र की तरह उन गरीब पीड़ित मांओं से भी जाकर मिलतीं, जिनकी गोद केवल उनकी पार्टी की सरकार की लापरवाही आदि के कारण उजड़ गई हैं।’ मायावती ने कहा कि यदि वे इन बच्चों की मांओं से नहीं मिलतीं तो अभी तक किसी भी मामले में उप्र में पीड़ितों के परिवार से मिलना राजनीतिक स्वार्थ व कोरी नाटकबाजी ही मानी जाएगी।

मां-बच्चे स्वस्थ रहें, हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: गहलोत
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले पर ट्वीट किया, ‘जेके लोन अस्पताल, कोटा में हुई बीमार शिशुओं की मृत्यु पर सरकार संवेदनशील है। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। कोटा के इस अस्पताल में शिशुओं की मृत्यु दर लगातार कम हो रही है। हम आगे इसे और भी कम करने के लिए प्रयास करेंगे। मां और बच्चे स्वस्थ रहें, यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।’

ट्विटर पर छाया ‘कोटा के दोषी’
बता दें कि गुरुवार को ट्विटर पर ‘कोटा के दोषी’ और ‘कोटा ट्रेजडी’ शब्द ट्रेंड कर रहे थे। यहां हजारों की तादाद में यूजर्स ने कांग्रेस एवं उसकी सहयोगी पार्टियों की ‘खामोशी’ और कथित ‘सेकुलर’ पत्रकारों की चुप्पी पर सवाल दागे।