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तालिबान के बाद आईएस का अखाड़ा बनेगा अफगानिस्तान? धमाके से सामने आया उइगर मुस्लिम कनेक्शन
अपने दावे में आईएस ने आत्मघाती हमलावर की पहचान एक उइगर मुस्लिम के तौर पर की
 
आईएस से जुड़ी अमाक समाचार एजेंसी ने कुंदुज प्रांत में मस्जिद में दोपहर की नमाज के दौरान हुए विस्फोट की घटना के कुछ घंटे बाद इस दावे की जानकारी दी।

काबुल/दक्षिण भारत/एपी। अफगानिस्तान के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अमेरिकी सुरक्षा बलों की वापसी के बाद इस देश में अराजकता, मारकाट की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। शुक्रवार को उत्तरी अफगानिस्तान में शिया मुस्लिम नमाजियों से भरी एक मस्जिद में शुक्रवार को हुए विस्फोट में कम से कम 50 लोग मारे गए और दर्जनों अन्य घायल हो गए थे। 

इस बीच, आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने मस्जिद में हुए बम धमाके की जिम्मेदारी ली और कहा कि उसके आत्मघाती हमलावर ने घटना अंजाम दिया। ऐसे में सवाल है, क्या अब तक तालिबान के हमलों से लहूलुहान हुआ अफगानिस्तान आईएस के लिए हिंसा का अखाड़ा बन जाएगा?

आईएस से जुड़ी अमाक समाचार एजेंसी ने कुंदुज प्रांत में मस्जिद में दोपहर की नमाज के दौरान हुए विस्फोट की घटना के कुछ घंटे बाद इस दावे की जानकारी दी। अपने दावे में आईएस ने आत्मघाती हमलावर की पहचान एक उइगर मुस्लिम के तौर पर की और कहा कि हमले में शियाओं और तालिबान दोनों को निशाना बनाया गया जो कि चीन से उइगरों की मांगों को पूरा करने में बाधा बन रहे हैं।

तालिबान के प्रवक्ता बिलाल करीमी ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि 46 नमाजियों की मौत हो गई जबकि 143 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच जारी है।

इस्लामिक स्टेट समूह के आतंकवादियों का अफगानिस्तान के शिया मुस्लिम अल्संख्यकों पर हमला करने का लंबा इतिहास रहा है। शुक्रवार को जिन लोगों को निशाना बनाया गया, वे हजारा समुदाय से हैं, जो सुन्नी बहुल देश में लंबे समय से भेदभाव का शिकार बनते रहे हैं। यह हमला अमेरिका और नाटो सैनिकों की अगस्त के अंत में अफगानिस्तान से वापसी और देश पर तालिबान के कब्जे के बाद एक भीषण हमला है।

गोजर-ए-सैयद अबाद मस्जिद में शुक्रवार की नमाज के दौरान विस्फोट ऐसे समय में हुआ है, जब तालिबान सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने की कोशिश कर रहा है और उसके लिए यह एक नई सुरक्षा चुनौती है।

इससे पहले, कुंदुज प्रांतीय अस्पताल के एक अधिकारी ने कहा था कि हमले में कम से कम 25 लोग मारे गए, जबकि 51 अन्य घायल हो गए। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े शुरुआती हैं क्योंकि हताहतों को निजी अस्पतालों में भी भेजा गया है। प्रत्यक्षदर्शी अली रेजा ने बताया कि वह विस्फोट के वक्त नमाज अदा कर रहे थे और उन्होंने कई हताहतों को देखा।

घटनास्थल की तस्वीरों और वीडियो में बचावकर्मी मस्जिद से कंबल में लिपटे शवों को एंबुलेंस में रखते दिखाई देते हैं। स्थानीय निवासी हुसैनदाद रेजायी ने बताया कि विस्फोट होने के शीघ्र बाद वह मस्जिद की ओर दौड़े। उनहोंने कहा, ‘नमाज शुरू होने के साथ विस्फोट हुआ। मैं अपने रिश्तेदारों को तलाशने वहां पहुंचा। मस्जिद लोगों से भरी हुई थी।’

इस बीच, तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि तालिबान के विशेष बल मौके पर पहुंच गये हैं और घटना की जांच कर रहे हैं। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन ने शुक्रवार के हमले की निंदा की और कहा कि यह धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर की जाने वाली हिंसा की पद्धति का हिस्सा है।

प्रमुख शिया धर्मगुरु सैयद हुसैन अलीमी बल्खी ने हमले की निंदा की और तालिबान से अफगानिस्तान में शियाओं के लिए सुरक्षा मुहैया कराने का आग्रह किया।

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