भारतीय मुद्रा
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इस दीपावली ड्रैगन के खजाने पर जोरदार पड़ी चोट

यह सिर्फ शुरुआत, आगे जारी रहनी चाहिए मुहिम

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। इस दीपावली ‘स्वदेशी’ की जगमगाहट चीनी माल पर भारी पड़ी। त्योहारी सीजन में स्वदेशी का बोलबाला रहा और लोगों ने चीनी उत्पादों से परहेज किया। इसी का नतीजा है कि विभिन्न सर्वेक्षण यह जाहिर कर रहे हैं कि त्योहारी सीजन में भारतीयों की रुचि भारतीय सामानों में ही ज्यादा रही।

दूसरे शब्दों में कहें तो भारतीयों की एकजुटता ने अड़ियल और धोखेबाज चीन के खजाने पर जोरदार चोट की है। इसका सीधा फायदा स्वदेशी उत्पादों को मिला है। दीपावली पर चीनी झालरों के बजाय गोबर और मिट्टी से बने दीये जगमगाते मिले। कई व्यापारियों ने तो अपने प्रतिष्ठानों पर यह तक लिख रखा था कि ‘यहां चीनी माल नहीं बेचा जाता’।

अब जरूरी है कि इस मुहिम को और आगे बढ़ाया जाए। अभी क्रिसमस, नया साल, मकर संक्रांति और होली जैसे पर्व, खास मौके आने वाले हैं। सर्दियां भी शुरू हो गई हैं और ऊनी कपड़ों की मांग बढ़ने लगी है। ऐसे में ‘ड्रैगन’ पर भारतीय रुपए की चोट ज्यादा ताकत के साथ और भरपूर होनी चाहिए, अन्यथा अब तक की मेहनत पर पानी फिर जाएगा।

गलवान घाटी की घटना के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी तादाद में लोगों ने चीनी माल के बहिष्कार की मुहिम छेड़ी थी जिसका धरातल पर असर अब दिखाई देने लगा है। लोकल सर्किल्स की एक रिपोर्ट कहती है कि इस त्योहारी सीजन में 29 प्रतिशत लोगों ने ही चीन में निर्मित चीजों के संबंध में पूछताछ की थी। पिछले साल यह आंकड़ा 48 प्रतिशत था।

इस सर्वेक्षण में 14,000 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया। सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले साल नवंबर में जब ग्राहकों से यही सवाल किए गए तो पाया गया कि 48 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने चीनी उत्पाद खरीदने की बात मानी। इस साल यह आंकड़ा 29 प्रतिशत रहा है। अगर वार्षिक आधार पर आकलन किया जाए तो 40 प्रतिशत की भारी-भरकम गिरावट है। हालांकि, अभी और प्रयास किए जाने की जरूरत है।

स्वदेशी उत्पादों की बिक्री बढ़ाने में सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। फेसबुक, ट्विटर, वॉट्सऐप और यूट्यूब पर ऐसे वीडियो, नारे खूब शेयर हुए जिनमें स्वदेशी अपनाने की अपील की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विभिन्न अवसरों पर ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर देते नजर आए जिसका लोगों पर गहरा असर हुआ है। अब देशवासियों को आगामी त्योहारों और महत्वपूर्ण अवसरों के लिए खुद को तैयार कर लेना चाहिए ताकि देश का रुपया देशवासियों के ही काम आए और हर घर में खुशहाली लाए।