प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से 'आत्मनिर्भर भारत' निर्माण का आह्वान किया है, जिसकी खूब चर्चा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से 'आत्मनिर्भर भारत' निर्माण का आह्वान किया है, जिसकी खूब चर्चा है।

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। गलवान घाटी में भारत के 20 सैनिकों की शहादत के बाद चीनी माल और एप्स के बहिष्कार की मुहिम जोर पकड़ती जा रही है। इसी क्रम में भारतीय कं​पनियों के सामान और स्वदेशी एप्स के लिए आवाज बुलंद हो रही है। इस मुहिम के असर से चीन को आर्थिक झटके लगने शुरू भी हो गए हैं।

अब सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है जिसके तहत चीनी उत्पादों पर दोहरी चोट पड़नी तय है। दरअसल सरकार ने कहा है कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस पर यदि कोई विक्रेता सामान बेचता है तो उसे इस का उल्लेख करना होगा कि यह सामान किस देश का है। इसका सीधा असर चीनी माल पर होगा क्योंकि इस ​स्थिति में लोग आसानी से यह मालूम कर सकेंगे कि कौनसा सामान भारतीय है और कौनसा चीनी अथवा अन्य देश का।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने विक्रेताओं के लिए यह अनिवार्य बना दिया है कि जीईएम पर सभी नए उत्पादों को पंजीकृत करने के समय वे उत्पत्ति के देश के बारे में जानकारी अवश्य दें।

मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा जिन विक्रेताओं ने जीईएम पर इस नए फीचर के लागू होने से पूर्व अपने उत्पादों को पहले ही अपलोड कर दिया, उन्हें चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने इसे अपडेट नहीं किया तो उनके उत्पादों को जीईएम से हटा दिया जाएगा। उन्हें नियमित रूप से उत्पत्ति के देश का नाम अपडेट करने के बारे में सूचित किया जा रहा है।

मंत्रालय ने बताया कि जीईएम ने यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देने के लिए उठाया है। जीईएम ने उत्पादों में स्थानीय कंटेंट की प्रतिशतता का संकेत देने के लिए भी एक प्रावधान किया है। इस नए फीचर के साथ, अब उत्पत्ति का देश तथा स्थानीय कंटेंट की प्रतिशतता सभी मदों के लिए मार्केटप्लेस में दृष्टिगोचर हैं। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि अब पोर्टल पर ‘मेक इंन इंडिया’ फिल्टर सक्षम बना दिया गया है।

मंत्रालय ने बताया कि खरीदार केवल उन्हीं उत्पादों की खरीद कर सकता है जो कम से कम 50 प्रतिशत के स्थानीय कंटेंट के मानदंड को पूरी करते हैं। बोलियों के मामले में, खरीदार अब क्लास 1 स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं (स्थानीय कंटेंट 50 प्रतिशत से ज्यादा) के लिए किसी भी बोली को आरक्षित कर सकते हैं। 200 करोड़ रुपए से नीचे की बोलियों के लिए केवल क्लास 1 तथा क्लास 2 स्थानीय आपूर्तिकर्ता (स्थानीय कंटेंट क्रमशः 50 प्रतिशत से ज्यादा और 20 प्रतिशत से ज्यादा) ही बोली लगाने के पात्र हैं जिसमें क्लास 1 आपूर्तिकर्ता को खरीद वरीयता प्राप्त होगी।

मंत्रालय ने बताया कि अपनी शुरुआत से ही जीईएम ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। मार्केटप्लेस ने वास्तविक अर्थों में ‘मेक इन इंडिया’ तथा सरकार की एमएसई खरीद वरीयता नीतियों को कार्यान्वित करते हुए सार्वजनिक खरीद में छोटे स्थानीय विक्रेताओं के प्रवेश को सुगम बनाया है।

मंत्रालय ने बताया कि जीईएम इस महत्वपूर्ण समय में जब सरकारी संगठनों को कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ने के लिए तत्काल उत्पादों एवं सेवाओं की आवश्यकता है, त्वरित, दक्ष, पारदर्शी और किफायती खरीद को सक्षम बना रहा है। सरकारी उपयोगकर्ताओं द्वारा जीईएम के माध्यम से खरीदों को वित्त मंत्रालय द्वारा सामान्य वित्तीय नियम, 2017 में एक नए नियम संख्या 149 को जोड़े जाने के जरिए अधिकृत और अनिवार्य बना दिया है।