नम्रता के साथ अच्छाई को अपनाएं : रवीन्द्रमुनिचेन्नई। यहां साहुकारपेट स्थित जैन भवन में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय उपाध्यायश्री रवीन्द्रमुनिजी ने मंगलवार को अपने प्रवचन में कहा कि ज्ञानी मनुष्य अपनी मेहनत से जो चाहता है उसे प्राप्त कर लेता है लेकिन भगवान का एक सच्चा भक्त अगर मन से भक्ति करे तो उसे सब कुछ हासिल हो जाता है। उन्होंेने कहा कि धार्मिक व्यक्ति तब तक धार्मिक नहीं बनता जब तक उसे खुद से ज्यादा दूसरों में अच्छाई नहीं दिखती। जिस दिन हमें दूसरों की बुराइयों से ज्यादा उनकी अच्छाई नजर आने लगेगी, तो सब बदल जाएगा। रवीन्द्रमुनिजी ने कहा कि आज के समय मेंे व्यक्ति को अगर किसी अच्छी चीज के बारे में बताया जाए तो वह प्रमाण मांगता है लेकिन यदि किसी की बुराई की बात सुनता है तो तुरंत ही यकीन कर लेता है। जबकि मनुष्य को ऐसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से हम किसी की अच्छाई का प्रमाण मांगते है उसी प्रकार से हमें लोगों की बुराइयोंे को भी अपनी आंखों से देखने के बाद ही स्वीकार करना चाहिए। मुनिश्रीजी ने कहा कि वंदनशील व्यक्ति लोगों की लाख बुराइयों के बीच भी उसकी अच्छाई ढूंढकर उसे अपनाते हैं। इसी प्रकार से हर व्यक्ति को वंदनशील बनकर लोगों की बुराइयों को एक साइड कर उसकी अच्छाइयों को अपनाना चाहिए। वंदनशील के साथ-साथ मनुष्य को सहनशील भी होना चाहिए। इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष आनंदमल छलाणी ने सभी का स्वागत किया। संघ के मंत्री हस्तीमल खटो़ड ने संचालन किया।