चेन्नई/दक्षिण भारतयहां साहुकारपेट स्थित राजेन्द्र भवन में चातुर्मासार्थ विराजित आचार्यश्री जयन्तसेनसूरीश्वरजी के शिष्य मुनिश्री संयमरत्नविजयजी व मुनिश्री तीर्थरुचि जी की निश्रा में जैन महासंघ के तत्वावधान में साधर्मिक भाई-बहनों को हर महीने की तरह अक्टूबर महीने में दिपावली का विशेष राशन वितरण मुख्य अतिथि समाजसेवी नोखा के दीपचंद (पप्पूसा) लूणिया के शुभ हस्ते किया गया। मुनि श्री संयमरत्न जी ने कहा कि सैंक़डों में कोई एक शूरवीर निकलता है, हजारों में कोई एक पंडित होता है, दस हजार में कोई एक वक्ता जन्म लेता है,लेकिन दाता तो कभी-कभी ही जन्म लेता है। दाता सर्वत्र उपलब्ध नहीं होते। हमें दान देने के साथ ही दान लेने वालों के भीतर ऐसा स्वाभिमान जगाना है कि वे लेना नहीं अपितु देना सीख जाए। हर जगह ऐसे लघु उद्योग हो, जिससे साधर्मिक बंधु ही नहीं अपितु अन्य असहाय लोग भी अपनी आजीविका का साधन जुटा सके और पराधीनता से धीरे-धीरे स्वाधीनता अपना ले। दान देने के साथ हमें नाम की चाहना नहीं रखी चाहिए। गुप्त दान महान पुण्यकारक होता है। जो गुप्त रूप से दान करता है, उसे गुप्त रूप से ही खजाना मिलता है। अशक्त प्राणियों को सशक्त बनाने का प्रयास करते रहना चाहिए। इस अवसर पर तीर्थरुचिजी ने कहा कि हमारे साधर्मिक मजबूत रहेंगे, तो धर्म भी मजबूत रहेगा।दीपावली पर्व पर राशन वितरण के विशेष सहयोगी मोहन मुथा, चंद्रप्रभु जैन सेवा मंडल, राजस्थान कोस्मो क्लब, बनासकांठा पालनपुर जैन एशोसिएशन, पट्टालम जैन संघ, पीपल फॉर पीपल, शंखेश्वर कॉरपोरेशन, उमरावबाई मीठालाल संचेती, रमेशचन्द हिरानी, संघवी रुपचन्द, कमलाबाई मेहता रहे। जैन महासंघ अध्यक्ष सज्जनराज मेहता, महामंत्री सूरज धोका, संयोजक पन्नालाल सिंघवी, सचिव सुरेश बागरेचा, बाबूलाल मेहता, भंवरलाल परमार, मांगीलाल देशरला, कान्तिलाल भंडारी, जैन महासंघ महिला विभाग संयोजिका श्रीमती कमला मेहता, बाली जैन सेवा मंडल के सदस्य इस मौके पर उपस्थित थे।