आचार्य भिक्षु का बलिदान सदैव अमर रहेगा : मुनि रणजीत

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मण्ड्या। आचार्यश्री भिक्षुजी भगवान महावीर के प्रतिनिधि पुरुष थे। जिनवाणी के प्रति उनमें अगाध श्रद्धा थी। वे सिद्धांत और साधना के प्रबल पक्षधर थे, यह कहा मुनिश्री रणजीतकुमारजी ने। वे यहां तेरापंथ भवन में सोमवार को आचार्यश्री के 215वें चरमोत्सव पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यद्यपि तेरापंथ के प्रारंभिक काल में भिक्षुजी को अनेक कष्टों का सामना करना पड़ा। स्वकल्याण के साथ वे जनता के उत्थान के लिए अहर्निशं पुरुषार्थ करते रहे। मुनिश्री ने कहा कि तेरापंथ के इतिहास में आचार्यश्री भिक्षुजी का बलिदान सदैव अमर रहेगा। इस मौके पर मुनिश्री चैतन्यकुमार ‘अमन’ ने कहा कि आचार्यश्री सत्य के खोजी पुरुष थे। उन्होंने आचार-विचार क्रांति करते हुए तेरापंथ की स्थापना की। इस अवसर पर महिला मंडल की तेरह सदस्याओं ने अपनी सामूहिक संगान गीत के साथ मंगलाचरण किया। संचालन तेयुप के मंत्री कमलेश गोखरु ने किया।