आत्मा में रमण करना ही है सामायिक : श्रुतमुनि

203

बेंगलूरु। यहां के हनुमंतनगर स्थित वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ में विराजित उपप्रवर्तक श्री श्रुतमुनिश्रीजी म.सा. व अक्षरमुनिजी के सान्निध्य में मंगलवार को पर्युषण पर्व के चौथे दिन श्रुतमुनिजी ने अपने प्रवचन में आत्मा कमाई-एक सामायिक विषय पर प्रवचन देते हुए कहा कि आत्म भाव में आना ही सामायिक है। आत्मा में रमण करना ही सामायिक है। भगवान महावीर ने राजा श्रेणिक को उनके नर्क गति में जाने से बचने के लिए बताए हुए उपायों में सामायिक भी एक उपाय है। एक सामायिक की साधना से बारह प्रकार के तपों की साधना फलीभूत होती है। सामायिक आत्मा का स्वभाव है। सामायिक में भावों की शुद्धि जरुरी है। विचारों की स्थिरता और भावों की पवित्रता ही सही सामायिक साधना व्रत की सार्थकता है। अक्षरमुनिजी ने अन्तगडदसा सूत्र का सरल सुबोध शैली में वाचन व विवेचन किया। कार्यक्रम का संचालन अध्यक्ष कल्याणसिंह बुऱड ने किया। संघ के मंत्री भंवरलाल गादिया व उपाध्यक्ष अशोक गादिया ने पर्युषण की विभिन्न जानकारियां दीं।