‘क्षमा लेने-देने से बढ़ती है आत्मऊर्जा’

बेंगलूरु। यहां अक्कीपेट स्थित स्थानक में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वीश्री साक्षीज्योतिजी के सान्निध्य में रविवार को सिद्धितप के आराधकों व अन्य तपस्वियों का रजत सिक्का प्रदान कर सत्कार किया गया। इस अवसर पर साध्वीश्री पूजाज्योतिजी ने अनेक प्रकार के पापोंे पर प्रकाश डालते हुए सरल भाषा में बताया कि अपने पूर्वजन्मों व इस जन्म के पापों का प्रायश्चित सभी ने किया।इस अवसर पर क्षमा का आदान-प्रदान भी किया गया। साध्वीश्री ने कहा कि क्षमा देने और लेने से तन-मन की शुद्धि होती है तथा आत्मऊर्जा बढती है। बच्चों द्वारा नाटिका प्रस्तुत की गई। संघ के अध्यक्ष संपतराज ब़डेरा ने तपस्वियों का बहुमान करते हुए सभी की सुखसाता पूछी व प्रसन्नता प्रकट की।साध्वीश्री राजमतीजी ने मंगलपाठ प्रदान किया।