गुरु के बिना परमात्म की प्राप्ति नहीं : आचार्य सुदर्शनलाल

दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कचेन्नई। यहां के पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम प्रांगण में आचार्यश्री सुदर्शनलालजी म. सा. ने रविवार को अपने प्रवचन में कहा कि साधना में भटकाव एवं समस्या से निजात पाने के लिए परमात्मा एवं गुरु की परम आवश्यकता होती है। हमारा लक्ष्य परमात्मा और मार्गदर्शक गुरु होते हैं। प्रभु और गुरु के प्रति उस प्रेम को क्या नाम दें जहां कोई विकार और चाहत नहीं होती है। गुरु के दरबार में मान-सम्मान-अभियान आदि समाप्त हो जाता है। समर्पण को किसी की पहचान की जरुरत नहीं होती, उसी निगुण साधना के आधार से परम सुख को प्राप्त कर सकते हैं। गुरु तो भक्त और भगवान के मध्य वो हेतु है जिनसे संसार सागर को पार कर परमात्व तत्व की सिद्धि हासिल होती है। बिना गुरु के मार्गदर्शन परमात्म प्राप्ति का लक्ष्य मुश्किल है। गुरु हमारे दिल में रहे, उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि हम गुरु के दिल में रहे। उस रिश्ते का कोई नाम नहीं होता। जहां सच्चे भाव एवं समर्पित विचारें से भक्ति की जाए। अध्यक्ष कमलचन्द खटो़ड ने कहा कि सोमवार को जन्माष्टमी का विशेष प्रवचन होगा। प्रवर्तक पन्नालालजी म. सा. की जयंती के मौके पर पंचदिवसीय कार्यक्रम पर २० अगस्त को भिक्षु दया का आयोजन रखा गया है।