‘जैनम जयंति शासनम’ के उद्घोषों के साथ निकाला गया वरघोड़ा

गर्भगृह में भगवान की प्रतिमा को पुन: विराजित कर संपन्न कराई धार्मिक क्रिया

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हैदराबाद। यहां के चारकमान स्थित श्री जैन श्वेताम्बर पार्श्वनाथ मंदिर के तत्वावधान में रविवार को संत अरुणविजयजी म.सा. के सुशिष्य मुनिश्री हेमंतविजयजी म.सा. की निश्रा में अक्षयनिधि तप का वरघो़डा मंदिर से गाजे बाजे के साथ ‘जैनम जयंति शासनम’’ के उद्घोषों के साथ निकाला गया। वरघो़डा गुलजार हौज, पटेल मार्केट, मामाजुमला फाटक होते हुए वापस मंदिर पहुंचा। यहां पर भगवान की प्रतिमा सविनय रंगमंडप के गर्भगृह में पुन: विराजित कर धार्मिक क्रिया संपन्न कराई गई।इस अवसर पर मुनिश्री हेमंतविजयजी म.सा. ने सामायिक के कर्त्तव्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सम्यगज्ञान, सम्यग दर्शन और सम्यग चारित्र एक दूसरे के पूरक हैं। ज्ञान के बिना धर्म की उपासना, आराधना करना पूर्णत: फलदायी नहीं होता है। ज्ञान के बिना कोई भी धर्मक्रिया लाभान्वित नहीं होती है। उन्होंने कहा कि श्रीसंघ में आज प्रसन्नता का दृष्टा देख मैं अभिभूत हो गया हूं। इसी तरह जिनशासन की सेवा में रहने से व्यक्तित्व में निखार तो अवश्य आएगा। गृहस्थ जीवन में सामायिक का व्रत समता का विकास करता है। वरघो़डा में पधारे समस्त धर्मानुरागियों की स्वामिवात्सला की व्यवस्था लाभार्थी जेठमल भीकचंद सिसोदिया परिवार की ओर से की गई थी। इस अवसर पर पुजारी ओमप्रकाश शर्मा ने केसर टीका लगाकर लोगों को स्वागत किया।