ज्ञानशाला के नए सत्र का नवीन सोच और नव्य मौलिकता के साथ हुआ शुभारम्भ

चेन्नई। यहां डॉ. मुनिश्री अमृतकुमारजी ठाणा-२ के सान्निध्य और निर्देशन में ज्ञानशाला के नए सत्र का नए तरीके से शुभारम्भ रविवार को हुआ। वर्ष २०१७-१८ वार्षिक सत्र के लिए साहुकारपेट ज्ञानशाला के शुभारम्भ के अवसर पर मुनिश्री अमृतकुमारजी ने ़कहा कि चेन्नई महानगर में संचालित ज्ञानशाला के आयोजन और व्यवस्था में जो ब़डा बदलाव किया गया है वह दूरगामी विशेष लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया गया है। चेन्नई महानगर में लगभग १७०० तेरापंथी परिवार प्रवासी हैं, इनमंे से वर्तमान में लगभग ८५० बच्चे ही ज्ञानशाला में ज्ञानार्थी है। आगे हमें ऐसे प्रयत्न करना है कि और ८००-८५० बच्चे ज्ञानशाला से लाभान्वित हो। इसके लिए जरूरी है ज्ञानशाला का स्कूली सिस्टम के जैसे संचालन हो ब़डी संख्या में बच्चों को व्यवस्थित प्रशिक्षण हेतु ब़डे स्थान की भी अपेक्षा है। यह चेन्नई महानगर की विशेषता है कि यहाँ शहर के बीचोंबीच दो-दो ब़डे विद्यालय समाज द्वारा संचालित हैं ऐसे में ज्ञानशाला के लिए अपेक्षित विशाल कक्षानुमा स्थान हमंे सहज ही उपलब्ध है। अगर ज्ञानशाला संचालन में गुणवत्ता और व्यवस्था पर अधिकाधिक ध्यान दिया जाएगा तो समाज का हर एक अभिभावक अपने बच्चे को ज्ञानशाला भेजने को स्वयमेव आगे आएँगे।शुभारम्भ कार्यक्रम में मुनिश्री नरेशकुमारजी ने ़कहा कि ज्ञानशाला बच्चों में संस्कारांे के बीजारोपण का सशक्त और सहज सुलभ माध्यम है। सभी का स्वागत करते हुए तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष संजय भंसाली ने कहा कि मुनिश्री की प्रेरणा से यह एकीकरण एक नया रंग लाएगा। चेन्नई ज्ञानशाला जो २८ वर्ष पूर्व शुरु हुई इसमें एक व्यवस्था का आना जरूरी था जिससे कि अनेक बच्चे इससे जु़डें। तेरापंथ जैन विद्यालय के ट्रस्टी भवरलाल मरलेचा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। ज्ञानशाला बैनर का उदघाटन तेरापंथ जैन विद्यालय के ट्रस्टी भंवरलाल मरलेचा एवं संजय भंसाली द्वारा किया गया।प्रायोगिक तौर पर दोनों तेरापंथ जैन विद्यालय में चलने वाली ज्ञानशाला के यातायात व्यवस्था, अल्पाहार एवं उपहार के प्रायोजक प्यारेलाल विनोद संजय सुनील पीतलिया परिवार रहे। मंच का संचालन ज्ञानशाला के संयोजक जितेन्द्र मालू और आभार ज्ञापन तेयुप के मंत्री भरत मरलेचा ने किया।