तप आत्मशुद्धि की प्रक्रिया : आचार्य चन्द्रयश

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बेंगलूरु। यहां देवनहल्ली स्थित सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम में आचार्यश्री चन्द्रयशसूरीश्वरजी व प्रवर्तकश्री कलापूर्णविजयजी की निश्रा में तपस्विनी रेखा कोठारी के उपवास की आराधना पूर्ण होने पर पच्चक्खाण व क्षीर समुद्र तप का पारणा मंगलवार को हुआ। इस अवसर पर आचार्यश्री ने तपोधर्म की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तप आत्मशुद्धि की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि बारह प्रकार से तप की आराधना हो सकती है। आचार्यश्री ने उपवास व आयंबिल के साथ उणोदरी रसत्याग के तप की भी जानकारी दी। चन्द्रयशजी ने धाम से जु़डे प्रकाश कोठारी के पुत्र नवीन कोठारी की पत्नी रेखा कोठारी द्वारा क्षीर समुद्र तप की अनुमोदना करते हुए कहा कि यह परिवार तीर्थ के आधारस्तंभ भोजनशाला का बेहतरीन संचालन कर रहा है। इस मौके पर कलापूर्णविजयजी ने भी तप की महिमा पर विचार रखे। ट्रस्ट द्वारा तपस्विनी रेखा का सत्कार किया गया।