धर्म प्रभावना वरघोड़ा भी है धर्म प्राप्ति का कारण : आचार्य महेन्द्रसागर

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धारवा़ड। यहां के चिंतामणि-शीतलनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में आचार्यश्री महेन्द्रसागरसूरीश्वरजी की निश्रा में पर्युषण महापर्व के आठों दिन दान, शील, तप सहित अनेक धार्मिक आराधनाएं हुई। पूर्णाहुति के मौके पर रविवार को शासन प्रभावना रथयात्रा (वरघो़डे) का आयोजन किया गया जिसमें ब़डी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस मौके पर आचार्यश्री ने कहा कि पर्युषण के दौरान श्रावकों के वार्षिक ११ कर्त्तव्यों के अंतर्गत धर्मप्रभावना रथयात्रा का भी एक कर्त्तव्य होता है। श्रावक के जीवन में धर्मप्रभावना का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। यदि हमारे निमित्त कोई धर्म कार्य की अनुमोदना, देव, गुरु और धर्म की प्रशंसा करता है तो वह जिनशासन के लिए सबसे ब़डी भेंट होगी और यह रथ यात्रा भी जिनशासन की प्रभावना का एक जीवंत उदारहरण है। आचार्यश्री ने बताया कि ऐसे तो प्रभु को और साधु साध्वियों को वरघो़डे और सामैया की चाह नहीं होती है परन्तु धर्मशासन की प्रभावना करने के लिए श्रावक को अवश्य ही इस तरह के आयोजन करने चाहिएं। इस तरह के शासन प्रभावना के आयोजन भी धर्मप्राप्ति के कारण बनते हैं। अन्नशालाएं खोलना, सम्यग ज्ञान की प्राप्ति के लिए पाठशालाएं खोलना तथा प्रभु के उपदेशों को जन-जन तक फैलाने का प्रयास करना भी शासन प्रभावना का कारण माना जाता है।