धार्मिक अनुष्ठान से मनाया आचार्य वर्धमानसागर का जन्मदिवस

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श्रवणबेलगोला। बीसवीं सदी के प्रथम दिगम्बराचार्य श्रीशांतिसागरजी महाराज की अक्षुण्ण परम्परा के पंचम पट्टाधीश दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के श्रेष्ठ आचार्य श्री वर्धमानसागरजी महाराज का ६७वां अवतरण दिवस श्रवणबेलगोला में धूमधाम से मनाया गया। सोमवार को प्रातःकाल की बेला में स्वस्ति श्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी के निर्देशन में उपस्थित समस्त भक्त गणों ने आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन किया। उपस्थित श्रावकों द्वारा गाजे बाजे के साथ आचार्यश्री की पूजा की गई। चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी ने आचार्यश्री के प्रति अपनी विनयांजलि समर्पित की । इस अवसर पर दिगम्बर जैन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मल सेठी ने आचार्यश्री के प्रति अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि वर्धमानसागर जी शांतिसागरजी म.सा. की इस परंपरा को नई ऊंचाई प्रदान कर रहे हैं और उनके सान्निध्य में तीसरी बार होने वाला गोम्मटेश्वर बाहुबली भगवान का महामस्तकाभिषेक ऐतिहासिक रूप से सफल होगा। त्यागीव्रती सेवा समिति के संयोजक राकेश सेठी ने जानकारी देते हुए बताया कि आचार्यश्री के जन्मदिवस के उपलक्ष पर और पर्युषण पर्व मनाने हेतु देश के विभिन्न भागों से श्रावक श्रवणबेलगोला पहंुच रहे हैं। पर्युषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की पूजन किया गया। आचार्य श्री ने उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन करते हुए कहा कि मायाचारी तिर्यंचगति का कारण है और कहा कि अधिक छल कपट करने वाले को कभी सुख प्राप्त नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बिल्ली दूध पीने के समय आने वाली आपदा को नहीं देखती, उसी प्रकार छल कपट करने वाला छल कर तो लेता है पर वो इस से आत्मा को होने वाले नुकसान को नहीं देखता। आचार्य श्री के जन्म दिवस के दिन उनको प़डगाहन और आहार देने का सौभाग्य श्रीमती तारामणिदेवी सेठी को प्राप्त हुआ।