पर्युषण में कीजिए दुर्गुणों को डिलिट : संत ललितप्रभ

भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव मंगलवार को

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बेंगलूरु में सोमवार को मराठा हॉस्टल में पर्युषण पर्व के मौके पर राष्ट्रसंत ललितप्रभ सागरजी म. सा. श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए।

बेंगलूरु। यहां मराठा होस्टल में पर्युषण पर्व के चौथे दिन सोमवार को राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ सागरजी ने कहा कि भगवान महावीर को अपने कानों में कीलें इसलिए खानी प़डीं क्योंकि उन्होंने पूर्व भव में अपने सेवक के कानों में खोलता हुआ शीशा डलवा दिया था। जब तीर्थंकर पुरुषों को भी किए गए कर्मों का फल भोगना प़डता है तो हम किस बाग की मूली हैं। इसलिए हम कर्म करते समय सावधान रहें। याद रखें हम कर्म करने में स्वतंत्र हैं, पर उसे वापस भोगने में परतंत्र हो जाते हैं। हमें चाहिए कि हम ऐसे कर्मों के बीज न बोएं कि जिनकी फसल काटते वक्त हमें खेद और ग्लानि का अनुभव करना प़डे। उन्होंने कहा कि कप़डे बदलकर संत बनना आसान है, पर व्यक्ति संत उस दिन बनता है जब उसका स्वभाव बदल जाता है। इसके लिए हम हाथ में दान का, दिल में दया का और जुबान में मिठास का अमृत रखें व अपनी कमाई का ढाई प्रतिशत भाग पुण्य कार्यों में अवश्य लगाएं। आप अपने बच्चों के लिए भले ही बादाम की व्यवस्था कर लें, पर गरीब प़डोसी बच्चे के लिए कम से कम मूंगफली की व्यवस्था करने का सौभाग्य ले ही लें। याद रखें, कमाता तो हर कोई है, पर ईश्वर की जब कृपा होती है तब व्यक्ति सत्कार्यों में धन लगा पाता है। संतश्री ने कहा कि पर्युषण पर्व के चौथे दिन हमें चार चीजों को जीवन में जो़डना चाहिए और चार चीजों को हटाना भी चाहिए। दान, शील, तप और भाव इन चारों को जीवन का हिस्सा बनाएँ और क्रोध, मान, माया और लोभ इन चारों को जीवन से दूर रखना चाहिए। अध्यक्ष महेन्द्र रांका ने बताया कि मंगलवार को सुबह ८.४५ बजे पर्युषण के पांचवंे दिन संतों के सान्निध्य में भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा जिसमें चौदह स्वप्नों को उतारा जाएगा एवं पालना झुलाया जाएगा।

बेंगलूरु में सोमवार को मराठा हॉस्टल में पर्युषण पर्व के मौके पर राष्ट्रसंत ललितप्रभ सागरजी म. सा. श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए।