पल्लावरम् में मनाया गया विकास महोत्सव

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चेन्नई। पल्लावरम तेरापंथ सभा भवन में मुनिश्री अमृतकुमारजी के सान्निध्य में २४वां ‘विकास महोत्सव‘ बुधवार को मनाया गया। मुनिश्री अमृतकुमारजी ने कहा कि तेरापंथ के दसवें अधिशास्ता आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने आचार्यश्री तुलसी के आचार्य पदारोहण दिवस को ‘विकास महोत्सव‘ के रूप में प्रस्थापित किया। वाकई में आचार्यश्री तुलसी का शासनकाल विकास के नवोन्मेष का काल था।उन्होंने विकास के अनेकानेक आयाम और अवदान प्रस्तुत किए शायद जिनकी गिनती भी असंभव है। २१वीं सदी की नई दीक्षा-समण श्रेणी, जैन दर्शन के अध्ययन हेतु जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय, और आगम संपादन जैसे अनेकों कालजयी अवदानों ने आचार्य तुलसी के शासनकाल को न केवल तेरापंथ अपितु जैन धर्म के ही नवीन संस्करण के रूप में प्रतिष्ठित किया। मुनिश्री नरेशकुमारजी ने अपने संयोजकीय वक्तव्य में चहुंमुखी विकास की परिभाषा का विवेचन करते हुए कहा कि किसी भी संघ, समाज या राष्ट्र का विकास तभी सार्थक और सफल हो सकता है भौतिक और आर्थिक विकास के साथ आध्यात्मिक और नैतिक विकास भी हो। कार्यक्रम के शुभारम्भ में श्रीमती शकुन्तलादेवी ने मंगलाचरण और श्री पंकज कोठारी ने गीतिका का संगान किया। स्थानीय सभा ट्रस्ट के अध्यक्ष मांगीलाल पितलिया, श्रीमती रेखा मरलेचा व श्रीमती हेमलता पिरोदिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनिश्री नरेशकुमारजी ने किया।