पालकी में सवार होकर भगवान ने किया नगर भ्रमण

गाजे-बाजे के साथ निकाली गई चैत्य परिपाटी यात्रा

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हैदराबाद। यहां के फीलखाना स्थित श्री महावीर स्वामी जैन श्वेताम्बर संघ के तत्वावधान में संतश्री अरुणविजयजी म.सा., मुनिश्री हेमंतविजयजी म.सा, साध्वीवृंद और साध्वीश्रीजी राजप्रज्ञाजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में रविवार सुबह ५.४५ बजे चांदी की पालकी में भगवान को विराजित कर गाजे-बाजे के साथ त्रिशलानंदन वीर की जय बोलो और महावीर के जय के उद्घोषों के बीच चैत्य परिपाटी प्रारंभ हुई। इसमें ब़डी संख्या में समाजजन शामिल हुए। शुरुआत में गाजे-बाजे के साथ यात्रा श्री अजितपार्श्व जैन श्वेताम्बर मंदिर कोठी पहुंची। यहां पर संघ प्रधान सुरेंद्र लूणिया और शीलकुमार आदि ने यात्रा की अगवानी कर बहुमान किया। मंदिर में विराजित संतश्री धर्मचंद्रविजयजी म.सा. ने सभी को धर्म लाभ दिया। उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने जिनालय में पक्षाल पूजा की। इसके पश्चात चैत्य परिपाटी भाग्यरत्ना कॉम्प्लेक्स जाम बाग स्थित श्रीआदिनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर पहुंची और यहां पर श्रद्घालुओं ने केसर पूजा कर भगवान का चैत्य वंदन किया। साथ ही कानमल वंदा, नेमीचंद्र झोटा और अशोक बंदा मूथा ने प्रभावना देकर अभिनंदन किया। इसी क्रम में यात्रा सीता बेकरी लेन स्थित श्रीआदिनाथ राजेंद्र जैन श्वेताम्बर जैन मंदिर पहुंची और यहां पुष्प-पूजा और धूप पूजा भगवान के दर्शन कर की गई। ट्रस्टी महेंद्रसिंघी, त्रिलोक झोटा, महावीर सिंघवी, जयंतीलाल बंंदा मूथा आदि ने यात्रा का स्वागत और बहुमान किया।

तत्पश्चात यात्रा गौमहल स्थित श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर पहुंची। यहां श्रद्घालुओं ने भगवान का चैत्यवंदन कर दीपक पूजा की। अंतिम चरण में यात्रा बेगम बाजार स्थित श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर पहुंची और यहां उपस्थित लोगों ने भगवान के दर्शन लाभ लिए। यात्रा सुबह ९ बजे महावीर भवन पहुंची। यहां पर श्रीमती शांतिदेवी मनरुपचंद बागरेचा परिवार ने सभी लोगों को अल्पाहार कराया। इस मौके पर संघ के ट्रस्टी प्रवीण विनायकिया, कीर्ति श्रीश्रीमाल, चातुर्मास व्यवस्था समिति के संयोजक अशोक विनायकिया, महेंद्र सिंघी, विक्रम डढा, सुरेश दोषी, सुरेश ढेलरिया, पारस पोरवाल, पारस ढेलरिया, संदीप ताते़ड, मुकेश ढेलरिया, ऋषभ बालिका मंडल से भाग्यवंती बेन, विमलादेवी, पूजा सिंघी, विनिता सुराणा सहित ब़डी संख्या में लोग उपस्थित थे।