राग द्वेष को तोड़ती है क्षमा : साध्वी धर्मलता

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बेंगलूरु। यहां विजयनगर में विराजित साध्वीश्री धर्मलताजी ने शनिवार को अपने प्रवचन में कहा कि भूलों को भूल जाओ तो भगवान बन जाओगे और नहीं भूले तो भव परंपरा बढ जाएगी। उन्होंने कहा कि संवत्सरी के पावन पर्व के सुनहरे समय में समता को जा़े़डना है और ममता को तो़डना है। साध्वीश्री ने कहा कि क्षमा राग द्वेष तो़डती है और प्रेम का पुल बांधती है। धर्मलताजी ने कहा कि क्षमाररुपी महल में प्रवेश करने के लिए ‘मिच्छामी दुक्क़डम पासपोर्ट’’ जरुरी है तभी क्रोधरुपी द्वारपाल क्षमा के महल में प्रवेश करने की स्वीकृति प्रदान करेगा। क्षमा के विशाल सागर में वैर का विसर्जन करके वैरी से जौहरी बनने की सीख भी साध्वीश्री ने दी। इस अवसर पर साध्वीश्री सुप्रतिभाजी ने भी विचार रखे। बालिका मंडल की ओर से व्यसन एवं फैशन से दुर्दशा पर कव्वाली की प्रस्तुति दी गई।