‘विकास के पायदान पर बढने वाला नहीं होता किसी का मोहताज’

मण्ड्या में 24वें विकास महोत्सव का आयोजन

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मण्ड्या। तेरापंथ धर्मसंघ के २४वें विकास महोत्सव के अवसर पर स्थानीय तेरापंथ भवन में मुनिश्री रणजीतकुमारजी ने कहा कि विकास के पायदान पर आगे बढने वाला किसी का मोहताज नहीं होता वह अपने ही बलबूते पर आगे बढता है। उन्होंेने कहा कि आचार्यश्री तुलसीजी एक ऐसे ही संत थे जो निरंतर विकास के राजमार्ग पर आगे बढते रहे। मुनिश्री ने कहा कि वे एक प्रयोगधर्मा आचार्य थे। उनका चिंतन तेरापंथ या जैनधम्र ही नहीं अपितु समग्र मानवजाति के हितार्थ था। उन्होंने मानवजाति के लिए अनके अवदान दिए। संकीर्ण दृष्टिकोण से परे हटकर उनका मानवता के विकास पर ध्यान के्द्रिरत था। रणजीतकुमारजी ने यह भी कहा कि ऐसी शासना और साधना तेरापंथ के आचार्यों में ही प्राप्त होती है।

इस अवसर पर मुनिश्री चैतन्यकुमारजी ‘अमन’’ ने कहा कि आचार्यश्री तुलसीजी ने सूरज बनकर दुनिया को प्रकाश बांटा। वे समज्ञ, आगमज्ञ, तत्वज्ञ और सर्वकला विशेषज्ञ आचार्य थे।