विकास के सर्जन पुरुष थे आचार्य तुलसी

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चेन्नई। साध्वीश्री काव्यलताजी के सान्निध्य में साहुकारपेट तेरापंथ भवन में बुधवार को विकास महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन रखा गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र से हुआ। महिला मंडल की सदस्याओं ने मंगलाचरण किया। साध्वीश्री काव्यलताजी ने कहा कि आज हम उस महापुरुष का विकास महोत्सव मना रहे हैं जिन्होंने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से धर्म संघ को नई ऊंचाइयां प्रदान की। उनकी सोच अलग थी। अणुव्रत, जीवन विज्ञान, नारी उत्थान आदि सभी क्षेत्र में उन्होंने कार्य किया। उन्होंने तेरापंथ के अनुशासन की यात्रा का आरंभ किया। आगे ब़ढना और विकास करना, पीछे मु़डकर नहीं देखना यही उनका लक्ष्य रहा। आचार्य तुलसी ने विकास के दो लक्ष्य बताए शक्ति और समर्पण। शक्ति है तो विकास कर सकेंगे और समर्पण भाव गुरु के प्रति होना चाहिए। आचार्य भिक्षु के प्रति समर्पण भाव उनका बेजो़ड था। बाईस वर्ष की अवस्था में दायित्व कि चादर ओढी थी और संकल्प लिया कि मुझे मानव मात्र की सेवा करना है। तुलसी द्वारा प्रदत्त अनुदान में अणुव्रत भी है जो सम्पूर्ण मानव जाति के लिए वरदान साबित हुआ। उन्होंने समणी दीक्षा की नई शुरुआत कर विदेशों में भी तेरापंथ धर्म की ध्वजा फहराई है। विदेशों में तेरापंथ की पहचान बनी है। चारदीवारी में रहने वाली नारी आज समाज के हर क्षेत्र में अव्वल बनी हुई है। साध्वीश्री ज्योतियशाजी साध्वीश्री सुरभिप्रभाजी, साध्वीश्री वैभवयशाजी ने विकास महोत्सव पर सुंदर गीतिका के माध्यम से अपने गुरु की अभिव्यक्ति दी। करण चिप़ड ने अपने भावों की प्रस्तुति दी। महिला मंडल के तत्वावधान में चल रहे साप्ताहिक प्रश्नोत्तरी के विजेताओं का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन साध्वीश्री ज्योतियशाजी ने किया।