संघ के विकास में निहित है स्वयं का विकास : साध्वी विद्यावती

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बेंगलूरु। यहां गांधीनगर स्थित तेरापंथ सभा भवन में बुधवार को साध्वीश्री विद्यावतीजी ‘द्वितीय’’ के सान्निध्य में तेरापंथ धर्मसंघ का २४वां विकास महोत्सव आयोजित हुआ। तेरापंथ सभा के अध्यक्ष कन्हैयालाल गिि़डया ने सभी का स्वागत किया। इस अवसर पर साध्वीश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि गत २३ वर्षों से संपूर्ण तेरापंथ भाद्रपद शुक्ल नवमी तिथि को विकास महोत्सव मनाता है। उन्होंने कहा कि नवमाचार्य श्रीतुलसी ने विकास की ऊंचाइयां प्रदान कर संघ का सर्वोतमुखी विकास किया। आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने अकूट साहित्य संपदा की श्रीवृद्धि की एवं प्रेक्षाध्यान जीवन विज्ञान से जन-जन को लाभान्वित किया। साध्वीश्री ने कहा कि वर्तमान में आचार्यश्री महाश्रमणजी अपने अलौकिक नेतृत्व कौशल से संघ को हिमायल सी ऊंचाइयां प्रदान कर रहे हैं तथा विकास के क्षितिज पर नए-नए आयामों द्वारा संघ में अमिट आलेख स्वर्णाक्षरों में अंकित हो रहे हैं। विद्यावतीजी ने कहा कि संघ का विकास ही स्वयं का विकास है। इस मौके पर साध्वीश्री प्रियंवदाजी ने ‘तेरापंथ की विकास यात्रा’’ विषयक अपने वक्तव्य में कहा कि तेरापंथ प्रगतिशील धर्मसंघ है। उन्हांेने कहा कि आचार्यश्री भिक्षु के क्रांतिकारी विचारों से इस संघ का प्रादुर्भाव हुआ। तेरापंथ की स्थापना होने के बाद अहर्निशं इस संघ का उत्कर्ष हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज २४वें विकास महोत्सव पर हमें संघ के उत्तरोत्तर विकास की कामना करते हुए व धर्मसंघ की प्रभावना में अपना-अपना योगदान देना चाहिए। तेरापंथ महिला मंडल की सदस्याओं के मंगलाचरण वाचन से शुरु हुए कार्यक्रम में साध्वीश्री प्रेरणाश्रीजी, ॠद्धियशाजी ने भी विचार रखे। साध्वीश्री मृदुयशाजी ने कविता प्रस्तुत की। अभातेमम की कार्यकारिणी सदस्य वीणा बैद ने भी अपनी बात कही। साध्वीश्री प्रियंवदाजी ने संचालन किया।