मदुरै। यहां के तेरापंथ सभा भवन में साध्वीश्री प्रज्ञाश्रीजी म.सा. ने मंगलवार को आचार्य भिक्षु के २१५ वें चरमोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा आचार्य भिक्षु ने अपने जीवन में आने वाले झांझावातों की परवाह न करते हुए धर्म की खरी कसौटी को लोगों के समक्ष रखा। साध्वीश्री ने कहा कि धर्म की चार कसौटियां हैं। पहली संयम, दूसरी जिनाज्ञा , तीसरी अमूल्यवत्ता की कसौटी है। धर्म का कोई मूल्य नहीं है। धर्म को धन से नहीं खरीदा जा सकता है। धर्म की चौथी कसौटी हृदय परिवर्तन है। धर्म परिवर्तन डंडे के बल पर नहीं हो सकता है। इस अवसर पर राष्ट्रीय उपासक डालमचंद नोलखा ने कहा कि आचार्य भिक्षु के सिद्घांत हमें लौकिक और लोकोत्तर को समझने की सही दृष्टि देते हैं। साध्य शुद्धि के शुद्ध साधन ही सहायक बन सकते हैं।साध्वीश्री सरलप्रभाजी ने आचार्य भिक्षु के बारे में अपने विचार रखे। साध्वी विनयप्रभाजी, प्रतीक प्रभाजी ने गीत के माध्यम से अपने विचार प्रकट किए। इस अवसर पर साध्वी सरलप्रभाजी, प्रतीकप्रभाजी और विनयप्रभाजी ने अनके श्रद्धालुओं को भिक्षु जप का सवा लाख जप करने का संकल्प करवाया। सोमवार की रात्रि मदुरै तेरापंथ भवन में तेरस की रात्रि का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में डालमचंद नोलखा ने ‘भिक्षु भक्ति में भाग्य ब़डा बलवान,हो दीपा नंदन प्यारे-तेरापंथ भाग्य सितारे, स्वामीजी थारी साधना री रुचि उसाई, तेरस री है रात बाबा आज थाने आणो है आदि भिक्षु भक्ति के भजनों से भाव विभोर कर दिया। उपासक नैनमल कोठारी, तेरापंथ सभा अध्यक्ष ओमप्रकाश कोठारी, तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष राजकुमार नाहटा ने राष्ट्रीय उपासक डालमचंद नोलखा को स्मृति चिन्ह एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया। ओमप्रकाश कोठारी,शारदादेवी बुऱड, तेयुप सहमंत्री अमृतलाल चोप़डा, बबिता गिि़डया, कोमल जीरावाला, लता कोठारी, बबिता लो़ढा आदि ने गीतिकाओं के माध्यम से धम्म जागरण में अपनी प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम का संचालन तेरपंथ सभा मंत्री धनराज लो़ढा ने किया।