सद्गुणों के लिए लालायित बनें : मुनि धर्मप्रभसागर

334

मदुरै। यहां के सुमतिनाथ जैन नया मंदिर ट्रस्ट के तत्त्वावधान में चातुर्मासार्थ विराजित मुनिश्री धर्मप्रभसागरजी म. सा. ने पर्युषण पर्व के प्रवचनमाला में कहा कि जीवन में पुनर्रावृति की हम आदि हो गये हैं। अब हमें परिवर्तन के प्रति गंभीरता से विचार करना चाहिए। हमें रिपिटेशन नहीं बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए कटिबद्ध होना प़डेगा। मुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में सद्गुणों के बिना सार्थक बदलाव नामुमकिन है। अतः हमें सद्गुणों के लिए लालायित होना चाहिए। जीवन में ऐसा कुछ लिखो कि सामने वाले को प़ढने का मन हो और जीवन में ऐसा कुछ करते चलो ताकि सामने वाले को लिखने का मन हो। मुनिश्री ने कहा कि वक्त आदमी को ब़डा बना सकता है लेकिन सद्गुण आदमी को निश्चित तौर पर महान बना देते हैं। भौतिक जगत में बेइंतिहा प्रतियोगिता है पर आध्यात्मिक जगत में कोई प्रतियोगिता नहीं है। बहिर्जगत में पुरुषार्थ करने के बाद भी निष्फलता मिल सकती है लेकिन आंतरिक जगत में निश्चित तौर पर सफलता ही मिलती है। इसलिए अवसर को अपने हक में मो़डकर सार्थक कार्य के लिए खुद को तैयार कर लें। गुरुवार को मुनिवृंदों की निश्रा में पर्युषण पर्व में हुए सिद्धि तप, उपवास व्रतधारी श्रावक-श्राविकाओं को तप पूर्णाहुति पर मंगल आशीर्वाद प्रदान कर तप का प्रत्याखान करवाया। सभी तपस्वियों की भव्य शोभा यात्रा श्री संघ के साथ बैंड बाजे के साथ निकाली गई। धर्मसभा में मुनिश्री धर्मशेखरजी म.सा. के मुखबिंद से तप आराधकों की अनुमोदना की गई।