समता में ही धर्म है : मुनि अमृतकुमार

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चेन्नई के पल्लावरम्‌ के तेरापंथ भवन में मुनि अमृतकुमार अभिनव सामायिक कराते हुए।

चेन्नई। आचार्यश्री महाश्रमणजी के शिष्य मुनिश्री अमृतकुमारजी एवं नरेशकुमार जी के सान्निध में एवं तेरापंथ युवक परिषद पल्लावरम द्वारा पल्लावरम् तेरापंथ सभा भवन में ’’अभिनव सामायिक’’ का अभ्यास किया गया जिसमें १७५ व्यक्तियों ने ३३५ सामायिक की। मुनिश्री अमृतकुमारजी ने कहा कि जैन वांगमय में कहा गया है ‘समया धम्म मुदाहरे मुनि‘ समता में ही धर्म है। सामायिक समता की साधना है। साधना का पहला सूत्र है सामायिक। सामायिक करने को कहा जाए तो कुछ व्यक्ति कहते हैं कि मेरा माइण्ड सैट नहीं। घर में सोफा सेट है, डिनर सेट है, टीवी सेट है, पर माइण्ड अपसेट है। सामायिक से आप अपने माइण्ड को सेट रख सकते हैं। जैसे औषधि बीमारी को ठीक कर देती है, एक छोटा सा यंत्र भारी-भरकम मशीन को ठीक कर देता है, ठीक उसी प्रकार सामायिक आपका माइण्ड ठीक कर सकती है।मुनिश्री नरेश कुमार जी ने कहा कि सामायिक से व्यक्ति के जीवन का रूपांतरण हो जाता है। प्रतिदिन सामायिक का अभ्यास करने से समता भाव स्थायी बन सकता है। जैसे कुएं से पानी भरते हुए रस्सी पत्थर पर बार-बार आती-जाती है, प्रतिदिन आने जाने से एक दिन पत्थर पर भी निशान बन जाता है, उसी तरह एक दिन समता भाव आ जाएगा। सामायिक का अर्थ है ‘समआय‘ सम यानी समता और आय यानी सम्यकज्ञान अर्थात सम्यकज्ञान ही सामायिक है, आत्मा का समाधि योग मे रहना सामायिक है ।

चेन्नई के पल्लावरम्‌ के तेरापंथ भवन में मुनि अमृतकुमार अभिनव सामायिक कराते हुए।