सहन करने वाला ही महावीर : आचार्य चन्द्रभूषण

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मैसूरु। यहां के सुमतिनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में चातुर्मासार्थ विराजित आचार्यश्री चन्द्रभूषणसूरीजी म. सा. की निश्रा में जन्म वाचन प्रसंग का आयोजन किया गया । इस मौके पर आचार्यश्री ने कहा कि प्रभु महावीर का जन्म दुनिया के लिए मिसाल है। प्रभु ने अपने जन्म होने से पहले ही अपने ज्ञान से माता पिता को अविरल प्रेम व सुख की अनुभूति करवाई तथा माता पिता रहते तक संसार न छो़डने का प्रण लिया। प्रभु का जन्म हमें सीख देता है कि माता पिता जब तक पृथ्वीतल पर विद्यमान है तब तक उनकी सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभु ने मात्र ३० वर्ष की उम्र में संयम ग्रहण कर हमें बताया कि त्याग में ही सुख है और भोग में दुख। आत्मा पर लगे कर्म के धब्बों को हम सहनशीलता व समता से धो सकते हैं।आचार्यश्री ने कहा कि जीतता वो है जो सामने वाले का सामना नहीं अपितु उसे सहन करता है और सामना करने वाला हारता है । दृढ शक्ति होने पर ही प्रभु से सभी उपसर्गों को सहन किया और कर्म शत्रु को हराया।