सामायिक है समता की साधना : साध्वी काव्यलता

प्रायोजकों का सम्मान करते हुए पदाधिकारी

445
चेन्नई के साहुकारपेट स्थित तेरापंथ स्कूल में पर्युषण पर्व के दौरान सोमवार को प्रायोजकों का सम्मान करते हुए पदाधिकारी
चेन्नई के साहुकारपेट स्थित तेरापंथ स्कूल में पर्युषण पर्व के दौरान सोमवार को प्रायोजकों का सम्मान करते हुए पदाधिकारी

चेन्नई। आचार्यश्री महाश्रमणजी की शिष्या साध्वीश्री काव्यलताजी के सान्निध्य में सोमवार को साहुकारपेट तेरापंथ स्कूल में पर्युषण पर्व का तृतीय दिवस ‘सामायिक दिवस’’ के रूप में आयोजित हुआ। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के तत्वावधान में तेरापंथ युवक परिषद् चेन्नई के द्वारा विराट अभिनव सामायिक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र से हुआ। साध्वीश्री काव्यलताजी ने कहा कि सामायिक समता की साधना है। सामायिक अन्तर-आत्मा की और मन की तल्लीनता का नाम है। साध्वीश्री ने ‘मन से सोचंे नहीं, वचन से बोलें नहीं और शरीर से हिलें नहीं’’ इस त्रिगुप्ती साधना के प्रयोग करवाए। साथ में परमेष्ठी वंदना का धर्म सभा के साथ गान करवाया। आचार्यश्री तुलसी द्वारा रचित ‘तेरापंथ रो भाग्य विधाता’’ गीत का गान किया गया। साध्वीश्री ज्योतियशाजी ने त्रिपदी वंदना विधि सहित करवाई। साध्वीश्री वैभवयशाजी ने प्रेक्षाध्यान और स्वाध्याय योग के प्रयोग करवाए। साध्वीश्री सुरभिप्रभाजी ने अ.सि.आ.उ.सा. मंत्र का एक स्वर में जप करवाया। भगवान् महावीर के सत्ताइस भवों का भी वाचन किया गया। साध्वीश्री काव्यलताजी ने कहा कि अभातेयुप एक सशक्त संघीय संस्थाओं में से एक है। प्रति वर्ष अभिनव सामायिक का विशाल आयोजन पूरे भारत में करती आ रही है। उन्होंने तेयुप चेन्नई द्वारा व्यवस्थित एवं सुन्दर आयोजन हेतु साधुवाद दिया। कार्यक्रम में अभातेयुप के राष्ट्रीय संयोजक रमेश डागा भी उपस्थित थे। अभिनव समायिक के साहुकारपेट संयोजक पुखराज पारख, ट्रिप्लिकेन संयोजक प्रमोद गादिया एवं पल्लावरम संयोजक दिलीप भंसाली थे। कार्यक्रम में जैन महासंघ के अध्यक्ष सज्जनराज मेहता भी उपस्थित थे और उन्होंने सामूहिक क्षमापना की विस्तृत जानकारी प्रदान की। सभाध्यक्ष धर्मचंद लुंकड ने सज्जनराज मेहता, रमेश डागा और प्रायोजक ललित दुगड का सम्मान किया। कुशल संचालन साध्वीश्री ज्योतियशाजी ने किया। आभार ज्ञापन तेयुप मंत्री गजेन्द्र खटे़ड ने किया।

चेन्नई के साहुकारपेट स्थित तेरापंथ स्कूल में पर्युषण पर्व के दौरान सोमवार को सामायिक करते हुए श्रावक