सिंहावलोकन का पर्व है संवत्सरी : साध्वी विद्यावती

बेंगलूरु। यहां गांधीनगर स्थित तेरापंथ भवन में साध्वीश्री विद्यावतीजी ‘द्वितीय’’ के सान्निध्य में शनिवार को धर्माराधना के साथ संवत्सरी महापर्व का आयोजन हुआ। इस अवसर पर साध्वीश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि संवत्सरी महापर्व जीवनोत्थान, आत्मनिरीक्षण एवं सिंहावलोकन का पर्व है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति से न चाहते हुए भी कभी-कभी गलतियां हो जाती हैं। मन मंे अशुभ विचारधारा, वचन से अप्रिय भाषा एवं काया से अप्रिय व्यवहार भी हो जाता है। साध्वीश्री ने भगवान ॠषभ, भगवान महावीर एवं साध्वी चंदनबाला का मार्मिक विवेचन भी किया। साध्वीश्री प्रियंवदाजी ने कहा कि संवत्सरी महापर्व सिंहावलोकन का पर्व है। यह पर्व त्याग, तप एवं जप का संदेश लेकर आता है। उन्हांेने कहा कि जैन जगत का यह एक आध्यात्मिक पर्व है। इस पर्व की उपयोगिता सिद्ध करने के लिए अधिकाधिक धर्माराधना करनी चाहिए। साध्वीश्री प्रेरणाश्रीजी ने प्रेक्षाध्यान का प्रयोग कराया। इस मौके पर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष कन्हैयालाल गिि़डया, मंत्री रमेश कोठारी, आचार्यश्री महाश्रमण चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष मूलचंद नाहर, तेरापंथ ट्रस्ट के मंत्री सुरेश दक ने अपने-अपने विचार रखे। पयुर्षण व्यवस्था के प्रायोजक रोशनलाल दिनेशकुमार राकेशकुमार अरविंदकुमार पोकरणा परिवार का सभा द्वारा आभार प्रकट किया गया। सोनल पिपा़डा ने गीत प्रस्तुत किया। कन्या मंडल ने कव्वाली तथा शांति सकलेचा ने समूह गीत प्रस्तुत किया। साध्वीश्री मृदुयशाजी ने साध्वीप्रमुखा सरदारांजी के जीवन पर प्रकाश डाला। ॠद्धियशाजी ने भी विचार रखे। प्राप्त विज्ञप्ति के अनुसार पयुर्षण में लगभग ५५ श्रावक-श्राविकाओं की तपस्याओं के प्रत्याख्यान कराए गए।